शामली। पिछले दो माह में ठंड, पाला कम पड़ने से किसान और कृषि वैज्ञानिकों की चिंता बढ़नी शुरू हो गई है। यदि ऐसा ही मौसम रहा तो गेहूं की बढ़वार रुक जाएगी। जिससे 15 से लेकर 20 प्रतिशत फसल की उत्पादकता कम होने की संभावना है।
जिले में गेहूं की बुआई नवंबर से शुरू हो जाती है। पूरे दिसंबर तक गेहूं की बुआई होती है। इसके बाद दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मार्च तक पाला और कोहरा पड़ने से मौसम ठंडा रहता था। मार्च के बाद मौसम गरम होता था। इस दौरान गेहूं में बालिया की बढ़वार पूरी हो जाने के बाद दाना बढ़ना शुरू हो जाता था। अप्रैल के आखिर तक गेहूं की फसल कटाई योग्य तैयार हो जाती थी।
मगर इस बार नवंबर-दिसंबर में मिलाजुला मौसम रहा है। जनवरी में मौसम में पाला-कोहरा न पड़ने से गेहूं की प्रतिकूल असर पड़ रहा है। पाला-कोहरा और पाला न पड़ने से कृषि वैज्ञानिक और किसान चिंतित हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि ऐसा मौसम चलता रहा तो गेहूं के पौधा पीला होना शुरू हो जाएगा। औसतन सात-आठ बालियों के स्थान पर इक्का दुक्का बालिया सिमट जाएगी।
दाना कमजोर हो जाएगा और जल्दी गेहूं पकने की उम्मीद बढ़ जाएगी। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के मृदा विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार अहलुवालिया ने कहा कि पिछले दो माह में पाला, कोहरा और ठंड पिछले सालो की अपेक्षा कम पड़ी है, अभी तक पूर्ण विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता है कि जनवरी, फरवरी, मार्च में मौसम ठंडा नहीं रहेगा। मौसम फिलहाल साफ है।