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अचानक 300 बच्चों के बीमार पड़ने का मामला गंभीर

Fri, 13 Oct 2017 12:19 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
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गैस रिसाव से बीमार छात्रा को शामली सीएचसी से मेरठ ले जाते परिजन। - फोटो : अमर उजाला
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शामली। सरशादी लाल शुगर मिल के डिस्टलरी प्लांट से गैस रिसाव प्रकरण की जांच के लिए बृहस्पतिवार को प्रदूषण नियंत्रण और कारखाना विभाग की टीम यहां पहुंची। टीम ने शुगर मिल, डिस्टलरी, बायोगैस प्लांट के अलावा सरस्वती शिशु मंदिर और शुगर मिल- खेडीकरमू मार्ग पर पहुंचकर छानबीन की। कई घंटे तक पड़ताल करने के बाद टीम लौट गई। उधर, सहायक निदेशक कारखाना अभिषेक सूर्यवंशी तथा बालकृष्ण शुक्ला ने बताया कि 300 बच्चों के बीमार होने का मामला गंभीर है। मामले की जांच की जा रही है।
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10 अक्तूबर को सर शादीलाल शुगर मिल की डिस्टलरी यूनिट के बायोगैस प्लांट से गैस रिसाव होने के कारण सरस्वती शिशु मंदिर जूूनियर हाईस्कूल और बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के करीब 300 बच्चों की हालत बिगड़ गई थी। इस प्रकरण की जांच के लिए बृहस्पतिवार दोपहर करीब 12 बजे सहायक निदेशक (मेरठ) कारखाना अभिषेक सूर्यवंशी और बालकृष्ण शुक्ला सहायक निदेशक कारखाना (सहारनपुर) के अलावा प्रदूषण नियंत्रण विभाग के सहायक वैज्ञानिक डीसी पांडेय अपनी टीम के साथ मामले की जांच करने के लिए शामली शुगर मिल पहुंचे। टीम ने शुगर मिल में घूमकर वहां के हालात देखे। इसके बाद डिस्टलरी यूनिट में पहुंचकर वहां उत्पादन की प्रक्रिया सहित अन्य जानकारी लीं। फिर टीम ने बायोगैस प्लांट में पहुंचकर छानबीन की। वहां सील लगाने की कार्रवाई के बारे में जानकारी ली। इसके बाद सरस्वती शिशु मंदिर जूनियर हाईस्कूल और बालिका इंटर कॉलेज की बिल्डिंग में जांच की । यहां से टीम ने शुगर मिल-खेड़ीकरमू संपर्क मार्ग पर पहुंचकर सड़क पर पड़े केमिकल के संबंध में छानबीन की। --- करीब 50 लोगों के बयान दर्ज किए जांच करने आई टीम ने शुगर मिल, डिस्टलरी यूनिट, बायोगैस प्लांट, दोनों स्कूल और मोहल्ला दयानंदनगर में रहने वाले लोगों से हादसे के बाबत बातचीत की। इस दौरान उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिर जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाचार्य उमेश कुमार और बालिका इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रविंद्र सिंह के अलावा शिक्षकों, मोहल्ला दयानंदनगर के निवासियों, शुगर मिल और डिस्टलरी तथा बायोगैस प्लांट पर तैनात कर्मियों सहित करीब 50 लोगों के बयान दर्ज किए।
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------- इन बिंदुओं पर की गई पड़ताल ---- -- शुगर मिल, डिस्टलरी और बायोगैस प्लांट कितने वर्ष पूर्व बने थे। -- शुगर मिल में कितने कर्मचारियों और अधिकारियों की नियुक्ति है । -- 10 अक्तूबर को बायोगैस प्लांट पर किस किस कर्मचारी की ड्यूटी थी -- तब बायोगैस प्लांट में किस गैस का उत्पादन चल रहा था और कितनी मात्रा में -- प्लांट में उत्पादित गैस का प्रयोग किस रूप में और किस तरह से किया जाता है -- हादसे के बाद जब सील लगाई गई थी, तब प्लांट किस स्थिति में था। -- बच्चों के स्वास्थ्य पर कैसा प्रभाव पड़ा, उपचार में क्या दवाई दिलाई गईं -- स्कूल में जिन कमरों में बच्चे बीमार हुए, वहां हवा के आने का क्या रास्ता है -- बायोगैस प्लांट के आसपास की आबादी में क्या स्थिति रहती है -- शुगर मिल-खेड़ीकरमू मार्ग पर मिला केमिकल किस रूप में प्रयोग होता है ----- वर्जन ----- सहायक निदेशक कारखाना अभिषेक सूर्यवंशी तथा बालकृष्ण शुक्ला ने बताया कि 300 बच्चों के बीमार होने का मामला गंभीर है। मामले की जांच की जा रही है। फिलहाल यही देखा जा रहा है कि बच्चों के बीमार होने के पीछे असल वजह क्या है। जांच पूरी होने पर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि शुगर मिल, डिस्टलरी और बायोगैस प्लांट की जांच नियमानुसार पूर्व में भी की जाती रही हैं।
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