शामली। कानून का पालन कराने का दंभ भरने वाली पुलिस के हाथ आखिर किसने बांध रखे थे? अवैध हथियारों से दनादन फायरिंग होती रही, बच्चे की मौत हो गई, पर पुलिस खामोश रही। फायरिंग करने वालों पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई? किस बात की लाचारी और बेचारगी थी। मौके पर पुलिस और पीएसी की कई गाड़ियां भी खड़ी थी, लेकिन फायरिंग करने वालों में पुलिस का जरा भी भय नहीं था।यदि अवैध असलहों और ताबड़तोड़ फायरिंग को देखकर भी अनदेखा किया गया तो भारी भरकम पुलिस फोर्स की जरूरत ही क्या थी।
कैराना में ब्लाक कार्यालय के बाहर सरेआम हर्ष फायरिंग करने की घटना को लेकर पुलिस और प्रशासन कठघरे में है। अमर उजाला और तमाम पुलिस अधिकारियों के पास वो वीडियो है जिसमे तमाम लोग अवैध हथियारों से फायरिंग कर रहे हैं। अमर उजाला ने हथियार लिए हुए लोगों के फोटो प्रकाशित भी किए।
आला अधिकारियों ने बार बार दावा किया था कि नियमों की अवहेलना करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा, तो खुलेआम बंदूक और तमंचों से गोलियां चलाने वालों के लिए वर्दीवालों की हनक कहां चली गई थी। सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि चुनाव के मद्देनजर जिले में आचार संहिता लगी हुई थी। यदि आचार संहिता के नियमों की बात करें, तो सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ इकट्ठा नहीं होनी चाहिए थी।
इसके विपरीत कैराना ब्लाक कार्यालय के बाहर कई सौ लोग रविवार सुबह से ही जमा हो गए थे। भीड़ के बीच ही युवकों के पास तमंचे और बंदूकें थीं। कंधे पर बंदूक टांगकर लोग आराम से घूम रहे थे, लेकिन पुलिस इस पर भी सतर्क नहीं हो सकी।
कैराना ब्लाक कार्यालय के बाहर जिस तरह एक दर्जन से ज्यादा लोगों ने ताबड़तोड़ ढंग से कई बार हवाई फायरिंग की, उससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में लोगों के पास असलहे थे। अधिकांश के पास तमंचे थे, तो कुछ बंदूकें थीं। बंदूकें लाइसेंसी हो सकती हैं। सवाल ये है कि इतने असलहे क्यों लाए गए। यदि टकराव हो जाता, तो पुलिस को स्थिति संभालनी भारी पड़ जाती।