शामली। कैराना ब्लाक कार्यालय के बाहर खड़े पुलिस और पीएसी के वाहन। चुनाव के दोनों ही पक्षों की भीड़ जमा, तभी शुरू हो गई फायरिंग। एक-दो नहीं, बल्कि 25 से ज्यादा राउंड गोलियां चलीं और वह भी तमंचों से। फायरिंग भी दो बार हुई, जिससे अफरातफरी मच गई, लेकिन पुलिस वालों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। नतीजा हर्ष फायरिंग में गोली ने मासूम समी की जान चली गई। यदि पहली बार की फायरिंग में ही पुलिस सतर्क होकर कुछ एक्शन लेती, तो शायद अनहोनी टल भी सकती थी।
गौरतलब है कि चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता लगी हुई थी। इसके बावजूद पुलिस ने कैराना ब्लाक कार्यालय के बाहर भीड़ जमा होने दी। पुलिस ने भीड़ को एक बार भी हटाने का प्रयास नहीं किया। हर्ष फायरिंग में गोली लगने से समी की मौत होने पर हर शख्स पुलिस की इसी लापरवाही को कोस रहा था। क्योंकि ब्लाक कार्यालय पर भीड़ जुटने के साथ ही भीड़ के बीच कुछ युवक अवैध असलहे लेकर पहुंचे हुए थे।
फायरिंग करने वालों को पुलिस का बिल्कुल खौफ नहीं था। यदि पुलिस पहले दौर की फायरिंग में ही आरोपियों की धरपकड़ कर लेती, तो दूसरी बार की फायरिंग नहीं हो पाती, मगर पुलिस ऐसा कर नहीं सकी। कैराना में ब्लाक कार्यालय पर दो बार में फायरिंग हुई।
एक बार नतीजा घोषित होने से पहले और फिर नतीजे आने के बाद। वैसे तो अवैध तमंचों से फायरिंग करने वाले सभी आरोपियों की पहचान होनी जरूरी है, लेकिन सवाल यह भी पैदा हो रहा है कि ई रिक्शा में अपनी मौसी के साथ जा रहे समी पुत्र अहसान को किसके तमंचे से निकली गोली लगी, कौन है समी का हत्यारा। पुलिस को जांच करनी होगी।