शामली। कैराना का फरहत खान खुद को वीआईपी बनाने के प्रयास में लगा था। उसने पुलिस सुरक्षा दिलाने की मांग की थी और राजनीतिक गलियारे में अपने संबंधों का फायदा उठाकर आला अफसरों पर दबाव भी बनवाने लगा था। जासूसी मामले में गिरफ्तारी होने पर फरहत खान के नए-नए राज खुलकर सामने आने लगे हैं।
नगरपालिका परिषद कैराना से नामित सभासद और जिला वक्फ बोर्ड सब कमेटी का अध्यक्ष बनने के बाद फरहत खान गनर लेकर खुद को वीआईपी प्रदर्शित करना चाहता था। राज्य सभा सांसद मुनव्वर सलीम का निजी सचिव होने के नाते उसने पुलिस सुरक्षा प्राप्त करने के लिए मांग कर दी थी।
स्थानीय स्तर पर जब उसकी मांग पूरी नहीं हुई तो उसने राजनीतिक रसूख का लाभ उठाकर आला अफसरों से संपर्क साधा तथा गनर दिलाने का दबाव बनाने लगा था। सूत्रों की मानें तो पुलिस सुरक्षा की फाइल आगे बढ़ रही थी तथा खुफिया विभाग से भी उस पर रिपोर्ट मांग ली गई थी। लेकिन 29 अक्तूबर को ही दिल्ली क्राइम ब्रांच ने फरहत खान को गिरफ्तार कर लिया।
तबादले कराने को लिखवाई गई थी सांसद से चिट्ठी
शामली। अफसरों के तबादले कराने में भी फरहत खान सक्रिय हो गया था। 15 दिसंबर 2015 में राज्यसभा सांसद मुनव्वर सलीम ने प्रदेश के नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खान को पत्र भेजकर शामली नगरपालिका परिषद की अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण का ट्रांसफर करने के लिए कहा था।
उस पत्र में सांसद मुनव्वर सलीम ने कहा था कि अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण का व्यवहार जनप्रतिनिधि और आमजन से ठीक नहीं है तथा पालिका के कार्यों में उदासीनता बरती जा रही है। पत्र में कहा था कि इसकी शिकायतें नगरपालिका के सभासदों द्वारा भी की गई हैं। चूंकि कैराना निवासी फरहत सांसद मुनव्वर सलीम का निजी सचिव रहा। माना जा रहा है कि उसके जरिये अधिशासी अधिकारी का तबादला कराने के लिए सांसद की चिट्ठी लिखवाई गई थी।