शामली। कैराना में व्यापारियों के लिए खौफ का पर्याय बने इनामी फुरकान को जेल भेजने के बाद भी कई सवाल अभी अनसुलझे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब रंगदारी का खेल खत्म हो जाएगा। क्या अब कोई व्यापारी पलायन करने के लिए मजबूर नहीं होगा। इस मसले पर अभी कोई बोलने को तैयार नहीं है।
कैराना में 2013 में रंगदारी का खेल शुरू हुआ। एक के बाद कई व्यापारियों से रंगदारी मांगी गई और पुलिस ने सुरक्षा मुहैया करा दी, लेकिन समय के साथ शांत हुआ तो पुलिस ने फोर्स हटा ली। रंगदारी नहीं देने से भन्नाए बैठे बदमाशों ने दस दिन के भीतर तीन व्यापारियों की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी।
विनोद सिंघल की हत्या फुरकान तथा शिव कुमार और राजेंद्र की हत्या मुुकीम गैंग द्वारा की गई। पुलिस ने इन सभी को पकड़कर जेल भेज दिया, लेकिन इस दौरान रंगदारी की दहशत कम नहीं हो पाई। विनोद सिंघल की हत्या के मामले में फुरकान करीब एक साल बाद जमानत पर जेल से छूटा। इसके बाद फिर फुरकान ने कैराना में व्यापारियों को टारगेट बनाकर रंगदारी मांगी और वसूली की। कुछ दिन पूर्व ही फुरकान ने रामअवतार वर्मा से रंगदारी मांगी।
पुलिस के मुताबिक फुरकान रामअवतार की हत्या की साजिश करने में जुटा था। वारदात को अंजाम देने से पहले ही वह पुलिस की गिरफ्त में आ गया। नाम नहीं छापने की शर्त पर व्यापारियों ने कहा कि फुरकान के लिए जेल से ज्यादा कोई सुरक्षित स्थान नहीं हो सकता। एक साल बाद या फिर दो साल बाद वह बाहर आ जाएगा।
सराफ ने कार्रवाई पर जताया संतोष
कैराना। 17 दिन पहले फुरकान द्वारा सराफ रामअवतार वर्मा से दो लाख की रंगदारी मांगने के बाद से बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ था। शनिवार को पुलिस मुठभेड़ के दौरान फुरकान की गिरफ्तारी के बाद बाजारों में कुछ चहल पहल दिखाई पड़ी। सराफ रामअवतार ने कहा कि पुलिस के कार्य से उसका परिवार खुश है। उसे अब किसी प्रकार का तनाव नहीं है। हालांकि सुरक्षा के लिहाज से अभी भी फोर्स व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर तैनात है।