कैराना। 50 हजार के इनामी फुरकान की अदालत में पेशी से पहले कोर्ट को छावनी के रूप में तब्दील कर दिया गया था। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से पूरी एहतियात बरती। वहीं रविवार को दोपहर एक बजे कांधला पुलिस के कई दरोगा अपनी सुरक्षा में फुरकान को एंबुलेंस में साथ लेकर अदालत परिसर पहुंचे। वह स्ट्रेचर पर ही लेटा रहा।
शनिवार को पुलिस मुठभेड़ के दौरान पकडे़ गए 50 हजार के इनामी फुरकान को जुडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम की अदालत में पेश करना था। इसलिए सुरक्षा के मद्देनजर दोपहर 12 बजे से ही कैराना कोतवाली प्रभारी राजकुमार शर्मा ने पुलिस व पीएसी के जवानों के साथ मोर्चा संभाल लिया था। दोपहर एक बजे कांधला पुलिस दो गाड़ियों में सवार होकर कचहरी परिसर पहुंची।
दोनों गाड़ियों के बीच घायल फुरकान की एंबुलेंस थी। फुरकान एंबुलेंस के अंदर स्ट्रेचर पर ही लेटा रहा। बाद में कांधला पुलिस ने फुरकान का रिमांड कराया। इसके बाद न्यायाधीश ने फुरकान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इस दौरान कोर्ट के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
पुलिस को कई सवालों का जवाब देना बाकी
शामली। मुठभेड़ में फुरकान की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस महकमे को अभी कई सवालों का जवाब देना ही होगा। पुलिस की कहानी पूरी तरह से गले नहीं उतर रही। सबसे पहला यही सवाल है कि कुख्यात फुरकान को पांच गोली लगने के बाद भी उसे अस्पताल से कैसे छुट्टी मिल गई। क्या फुरकान की सेहत महज कुछ ही घंटों में ठीक हो गई।
अस्पताल के चिकित्सकों ने उसे डिस्चार्ज करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई। क्या अस्पताल पर किसी का दबाव था। शनिवार को कांधला और कैराना पुलिस ने आल्दी गांव में पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान फुरकान को गिरफ्तार कर लिया था। फुरकान को पांच गोलियां लगी थी। आतंक का पर्याय बने फुरकान के पकड़े जाने का मामला नगर में चर्चा का विषय बना रहा।
उसकी गिरफ्तारी से व्यापारियों ने काफी राहत की सांस ली। हालांकि फुरकान की गिरफ्तारी को लेकर भी नगर में चर्चा आम थी। व्यापारियों का मानना है कि कहीं जेल से छूटने के बाद वह खुद पुलिस महकमे के लिए सिरदर्द न बन जाए।