शामली। नकली करेंसी का दाग कैराना के माथे से नहीं धुल रहा है। एक बार फिर कैराना का जाली करेंसी पकड़ी जाने के मामले में नाम सामने आया है। जिसके बाद से खुफिया तंत्र फिर सतर्क हो गया है। शनिवार को खुफिया तंत्र ने जाली करेंसी के साथ पकड़े गए आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई और उच्चाधिकारियों को आउटपुट भेजा।
दरअसल जाली नोटों की मंडी के रूप में कैराना बदनाम रहा है। कैराना निवासी इकबाल काना व हमीदा पाकिस्तान में बैठकर अपने गुर्गों के माध्यम से जाली करेंसी का खेल कराते रहे है। खुफिया विभाग व पुलिस अधिकारियों का मानना है कि हमीदा व इकबाल काना ही जाली नोटों व अन्य अवैध धंधों को पाकिस्तान से संचालित करते हैं।
दोनों ही भारत में नहीं है, बावजूद इसके खुफिया तंत्र की इन दोनों की गतिविधियों पर निगाह है। अब दिल्ली में जाली करेंसी के साथ पकड़े गए दो युवकों जिसमें एक कैराना के गांव मन्ना माजरा निवासी अरविन है, के बाद से बाहरी खुफिया इकाइयों के कान खड़े हो गए है, जिसके चलते शनिवार को एलआईयू तथा अन्य खुफिया विभाग के अधिकारी देर रात तक शामली के अधिकारियों से इनपुट लेते रहे। बीस साल में सामने आए कई केस ः बीस साल की अवधि में समय-समय पर कई मामले ऐसे पकड़े गए।
जिसमें गिरफ्तार लोगों से जाली नोट भारी मात्रा में बरामद हुए थे। उन्होंने पूछताछ में इकबाल काना और हमीदा उर्फ फैमीदा द्वारा नोटों को गठरी उद्योग के जरिए भेजे जाने की बात कही थी।
सोलह साल पूर्व कैराना के रहने वाले नौशाद व सादा व चौदह साल पहले शामली निवासी इमरान को भी हजारों के जाली नोटों के साथ पकड़ा गया था। इसके अलावा कैराना निवासी रियासत को मुजफ्फरनगर पुलिस ने पकड़ा था। इनमें इमरान को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि नौशाद व सादा का मामला कोर्ट में चल रहा है।
नेटवर्क से इकबाल का चलता है धंधा
इकबाल काना ने पाकिस्तान में बैठे जाली नोटों के कारोबार करने वाले तस्करों से संपर्क इस धंधे को पश्चिमी उत्तरप्रदेश में फैैलाया था। पुलिस की रड़ार पर जब वह चढ़ तो वह पाकिस्तान चला गया था। जिसके बाद से आज तक वह वही से बैठकर अपने धंधे को संचालित कर रहा है।