शामली में गैंगरेप के मुकदमे से बचने के लिए एक आरोपी ने मेरठ स्थित अस्पताल का फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र बनवा दिया और विवेचना में शामिल करा दिया। विवेचक ने जांच की तो मेडिकल फर्जी पाया गया। इसके बाद शामली कोतवाली में आरोपी युवक और उसके पिता सहित तीन आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
शामली कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी का तीन मार्च 2018 को अपहरण करने के बाद गैंगरेप किया गया था। मामले में गांव के ही सचिन उर्फ मिंटू सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। आरोपियों को गिरफ्तार करने में पुलिस जुटी हुई थी, लेकिन इसी दौरान आरोपियों ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। आरोपी सचिन ने अपने पिता कृष्णपाल और प्रहलाद के साथ पुलिस अधीक्षक के सामने पेश होकर प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि घटना वाले दिन वह (सचिन) मेरठ स्थित शिवलोक अस्पताल में भर्ती था।
इस बाबत उन्होंने एक मार्च से आठ मार्च तक का मेडिकल प्रमाण पत्र भी दिया था। उधर, पुलिस अधीक्षक ने मेडिकल प्रमाण पत्र के बारे में जांच के लिए विवेचक को निर्देश दिया था। मामले की जांच कर रहे उपनिरीक्षक विनीत मलिक ने मेडिकल प्रमाण पत्र की जांच की। मेरठ स्थित शिवलोक अस्पताल में एक से 8 मार्च तक भर्ती मरीजों का ब्यौरा लिया, तो पता चला कि सचिन पुत्र कृष्णपाल के नाम का कोई मरीज भर्ती नहीं रहा। पैथोलॉजिस्ट तेजवीर शर्मा और डाक्टर सीमा वर्मा द्वारा दर्ज कराए बयान में भी इसकी पुष्टि हुई। जिससे स्पष्ट हो गया कि सचिन द्वारा दिया गया मेडिकल प्रमाण पत्र फर्जी है।
इसके चलते उपनिरीक्षक विनीत मलिक की तरफ से आरोपी सचिन, उसके पिता कृष्णपाल तथा तीसरे आरोपी प्रहलाद के खिलाफ शामली कोतवाली में धोखाधड़ी के आरोप में रिपोर्ट दर्ज करा दी है। कोतवाली प्रभारी का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी का प्रयास चल रहा है।