शामली/कैराना। इकराम उर्फ टोला का बड़ा भाई अखलाक कुरैशी भी जरायम की दुनिया का खूंखार चेहरा बन गया था। कैराना में सराफा व्यापारी के बेटे और बुढ़ाना क्षेत्र में पशु व्यापारी के पुत्र की हत्या करने के बाद वह पुलिस की हिट लिस्ट में आ गया था। सहारनपुर पुलिस ने उसे भी मुठभेड़ में मार दिया था।
कैराना के मोहल्ला छड़ियान निवासी इकराम उर्फ टोला को बृहस्पतिवार रात मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने मार दिया, जबकि उसका साथी मौके से फरार हो गया। पुलिस ने इकराम का आपराधिक रिकार्ड खंगाला, तो उसके बडे़ भाई अखलाक की क्राइम हिस्ट्री भी सामने आ गई।
दरअसल, 20 साल पूर्व अखलाक कुरैशी ने कैराना के मोहल्ला गुंबद निवासी सराफा व्यापारी हरि प्रकाश मित्तल के छोटे बेटे आलोक की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके अलावा बुढ़ाना क्षेत्र के गांव जौला में कैराना निवासी पशु व्यापारी के पुत्र की हत्या में भी अखलाक आरोपी बना। उस हत्याकांड के दो साल बाद ही सहारनपुर पुलिस ने अखलाक को मुठभेड़ के दौरान मार गिराया था।
इसके बाद ही इकराम और उसका पिता मुंशी कैराना के मोहल्ला छड़ियान से अपना मकान बेचकर बड़ौत में जाकर बस गए थे। अखलाक की मौत के बाद उसके साथी प्रमोद ने गैंग की कमान संभाल ली थी और उसमें इकराम उर्फ टोला भी शामिल हो गया था।
पुलिस के मुताबिक इकराम उर्फ टोला ने भी अपने साथियों समेत मिलकर कई संगीन वारदातों को अंजाम दिया। 22 सितंबर 2016 को इकराम ने साहिबाबाद में सुनीता वर्मा की हत्या करके सोने के जेवर लूट लिए थे। इसके अलावा भी हत्या, लूट, चोरी की वारदातों को अंजाम दिया था।
कैराना से तोड़ दिया था नाता
इकराम और उसके पिता ने बड़ौत ंजाने के बाद कैराना से नाता तोड़ लिया था। मोहल्ला छड़ियान के लोगों का कहना है कि यहां से जाने के बाद इकराम और उसके पिता मुंशी ने कैराना में आना जाना छोड़ दिया था। शुक्रवार को जब लोगों को मालूम चला कि मुठभेड़ में मरने वाला इकराम उर्फ टोला है, तो लोगों को पुरानी बातें भी याद आ गईं।
ज्यादा खून बहने से हुई इकराम की मौत
शामली। दो माह में पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान कई कुख्यात बदमाशों को दबोचा। हर मुठभेड़ में बदमाशों की टांगो में गोलियां लगीं। बृहस्पतिवार की रात भी पुलिस की गोली का निशाना इकराम की टांगों पर लगा, लेकिन उसकी मौत हो गई। इसकी वजह ज्यादा ब्लड बहना और गोली लगने की दहशत बताई जा रही है।
बृहस्पतिवार की रात करीब 12 बजे जब इकराम को कैराना सीएचसी ले जाया गया, तब तक वह होश में था। उसका ब्लड काफी बह चुका था। पुलिस अधीक्षक डाक्टर अजयपाल शर्मा ने भी सीएचसी में पहुंचकर इकराम से बातचीत की थी। इसके बाद इकराम की हालत बिगड़ने लगी थी, जिसके चलते उसको शामली के प्राइवेट अस्पताल ले जाने के बाद मेरठ रेफर कर दिया गया था।
सीएचसी कैराना के डाक्टरों की माने तो इकराम का ब्लड काफी बह चुका था। उसका ब्लड प्रेशर भी कम हो रहा था। इसी वजह से उसे रेफर किया गया था। गौरतलब है कि नौशाद और सरवर एनकाउंटर को छोड़कर अब तक जिले में जितनी भी मुठभेड़ हुई, उनमें बदमाशों को टांग में ही गोलियां लगीं। यह बात अलग है कि टांगों में गोली लगने वाले वह सभी बदमाश जीवित रहे और इकराम की मौत हो गई।
कभी टांग, तो कभी सिर पर निशाना
पुलिस ने दो माह में कुख्यात बदमाश फुरकान, विपुल खूनी, शत्रु बालियान, इंशाद, नफीस और इसरान को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया। इन सभी बदमाशों की टांगों में गोलियां लगीं।
खास बात यह है कि इनमें से विपुल खूनी, शत्रु बालियान और इसरान से पुलिस की मुठभेड़ रात के अंधेरे में ही हुई। बावजूद इसके बदमाशों की टांगों में ही गोलियां लगीं, जिससे उनकी जान नहीं गई। जबकि कैराना क्षेत्र के गांव भूरा में नौशाद उर्फ डैनी तथा सरवर से भी रात में मुठभेड़ हुई तो पुलिस ने दोनों को मार गिराया था।
इन दोनों बदमाशों की टांग में एक भी गोली नहीं लगी थी। नौशाद उर्फ डैनी के शरीर में टांगों से ऊपर ही सभी गोलियां लगीं, जबकि सरवर के सिर में एक गोली लगी थी। मुठभेड़ के दौरान रात के अंधेरे में पुलिस की गोलियों का निशाना कभी बदमाशों की टांगों पर लगता है तो कभी सिर और सीने को भेद देता है।