ऊन/झिंझाना। लूटपाट के मामले में आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए गांव भंभेडी शाहपुर में दबिश देने गई पुलिस को घेरकर ग्रामीणों ने हमला बोल दिया। पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया।
इसके बाद लोगों ने ऊन बाईपास पर जाम लगाकर प्रदर्शन कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों शांत कराया। पुलिस पर हमला करने के मामले में 17 नामजद और 20 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। जिनमें से पुलिस ने 18 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
रविवार शाम किरयाना व्यापारी के मुनीम कन्हैया से बदमाशों ने ऊन झिंझाना रोड पर गांव ढिंढाली के पास 35 हजार रुपये, मोबाइल और बाइक लूट ली थी। रविवार रात करीब 11 बजे सूचना पर ऊन चौकी और झिझांना थाना पुलिस ने एक आरोपी को पकड़ लिया। जिससे पूछताछ के आधार पर पुलिस ने दूसरे आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए गांव भंभेडी शाहपुर में दबिश दी।
इसका पता चलते ही ग्रामीण इकट्ठा हो गए और पुलिस पर पथराव कर हंगामा करने लगे। आरोपी युवक को भी मौके से भगा दिया। पथराव के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस बीच पुलिसकर्मियों ने खेतों के रास्ते भागकर अपनी जान बचाई।
रात करीब साढ़े 11 बजे ग्रामीणों की भीड़ लाठी डंडे लेकर ऊन बाईपास मार्ग पर पहुंची और जाम लगाकर प्रदर्शन करने लगे। कहा कि पुलिस निर्दोष युवक को लूटपाट का आरोपी बनाकर उत्पीड़न कर रही है।
सूचना पर एसपी डॉ. अजयपाल शर्मा, सीओ और झिंझाना थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और हंगामा करने वालों को वहां से हटवाया। इसके बाद ग्रामीण अपने गांव लौट गए। उधर, झिंझाना थाने पर 17 नामजद और 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
जानवरों की तरह रस्से से बांधकर कोर्ट ले गई पुलिस
शामली। भंभेडी शाहपुर में दबिश के दौरान पुलिस पर हमला करने के मामले में गिरफ्तार किए गए 18 आरोपियों को कोर्ट ले जाते समय थाना झिंझाना पुलिस ने न तो मानवाधिकारों का ख्याल रखा और न ही सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का। जानवरों की तरह एक मोटी रस्सी से सभी आरोपियों को बांध कर गाड़ी में भर लिया गया।
गिरफ्तार लोगों पर लूट के आरोपी को बचाने के लिए पुलिस पर हमला करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसा संगीन आरोप है, लेकिन फिर कानून पुलिस को उनके साथ ऐसा व्यवहार करने की इजाजत नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति कृष्णा अय्यर ने सुनील बत्रा बनाम दिल्ली प्रशासन के मामले में गिरफ्तार आरोपियों को हथकड़ी लगाने को भी अमानवीय घोषित किया हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने ही प्रेमशंकर शुक्ला बनाम दिल्ली प्रशासन में भी कहा था कि गिरफ्तार व्यक्ति को हथकड़ी पहनाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना अमनवीय, अपमानजनक और उत्पीड़क है। ऐसा करना न्यायालय के आदेश की अवमानना है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध गंभीर प्रकृति का अपराध या गंभीर धाराओं में ज्यादा मुकदमे दर्ज होना हथकड़ी पहनाने का आधार नहीं है। स्वतंत्र भारत में हथकड़ी पहनाने का कोई नियम नहीं है।
अपवाद स्वरूप ही पहनाई जा सकती है हथकड़ी भी
सुनील गुप्ता बनाम स्टेट आफ मध्य प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि व्यक्ति खतरनाक है और उसके पुलिस अभिरक्षा से फरार हो जाने की संभावना है तो थाने की डायरी में अधिकारी को उसको हथकड़ी लगाने के कारणों का उल्लेख करना होगा। साथ ही अन्य कागजातों के साथ डायरी की प्रति और उसके भाग जाने की संभावनाओं के बारे में मजिस्ट्रेट को अवगत कराना होगा। उसके बाद न्यायिक अधिकारी की सहमति से हथकड़ी लगाई जा सकती है।
इन लोगों की हुई गिरफ्तारी
झिंझाना थानाध्यक्ष भगवत सिंह ने बताया कि पुलिस पर हमला करने वालों में नामजद रितेश, किशनपाल, श्रवण, रविकुमार, सुभाष, सुखचैन, रोहित, विशु, कुलदीप, विनोद, ब्रह्मपाल, सचिन, शिवकुमार, सहीन, कल्लू, अशोक और मनीष के अलावा लूट के आरोपी लोकेश निवासी भंभेडी को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपियों को सोमवार दोपहर न्यायालय में पेश करके जेल भेज दिया गया। लूट के मामले में अभी दो आरोपी और फरार हैं। जबकि पुलिस पर हमला करने वाले अज्ञात आरोपियों को भी चिह्नित किया जा रहा है।
दबिश देने में रही पुलिस की लापरवाही
भंभेडी शाहपुर में रविवार रात दबिश के दौरान पुलिस पर हमले में खुद पुलिस की लापरवाही भी उजागर हुई। मालूम चला है कि जब दबिश दी गई, तो तीन सिपाही डंडे लेकर मकान में घुसे थे, जबकि अन्य पुलिसकर्मी अपने वाहन में ही बैठे रहे। तीन पुलिसकर्मियों को ग्रामीणों ने घेर लिया था और हमला बोल दिया था। यदि आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए पर्याप्त पुलिसबल के साथ दबिश दी जाती, तो ग्रामीण पुलिस पर हमला करने का साहस नहीं कर पाते।