शामली के खुफिया विभाग की रिपोर्ट के आधार पर अब्दुल्ला को पकड़ने के लिए कई दिन से रेकी चल रही थी। खुफिया तरीके से उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। बुधवार की रात से डेरा डाले रही एटीएस और पुलिस टीम बृहस्पतिवार की सुबह अब्दुल्ला के घर के आसपास घेराबंदी की, तो हर कोई हैरान हो गया कि आखिर मामला क्या है। फिर अब्दुल्ला को पकड़कर जब टीम चली गई, तब भी लोगों को पता नहीं चला कि उसे क्यों पकड़ा गया है। कुछ लोगों ने पुलिस से पूछा भी, मगर उन्होंने यही जवाब दे दिया कि मामला संवेदनशील है, बाहर से टीम आई थी।
दरअसल, झिंझाना के मोहल्ला तलाही निवासी अब्दुल रहमान उर्फ अब्दुल्ला को एटीएस टीम ने उसके घर के पास ही मसजिद से पकड़ा, जहां वह बृहस्पतिवार सुबह नमाज पढ़ने गया था। वहां से अब्दुल्ला को पकड़ने के बाद उसके घर पहुंचकर टीम ने कुछ किताबें और दो मोबाइल फोन भी कब्जे में ले लिए। किताबों में वही शामिल थीं, जो अब्दुल्ला पढ़ रहा था। कुछ लोगों ने बताया कि पिछले चार दिन से एक अनजान व्यक्ति अब्दुल्ला के घर के आसपास घूम रहा था, वह मसजिद में नमाज भी पढ़ने गया था। उसे आसपास के लोग पहचानते तक नहीं थे। संभावना है कि खुफिया तरीके से अब्दुल्ला की रेकी कराई जा रही थी। वहीं, एटीएस ने अब्दुल्ला के साथ ही उसके परिवार के तीन मोबाइल फोन भी कब्जे में ले लिए। अब्दुल्ला के मोबाइल की कॉल डिटेल से काफी जानकारी हासिल होने की उम्मीद है, जिससे पता चलेगा कि वह किसके संपर्क में था। क्योंकि उसी मोबाइल के जरिये ही अब्दुल्ला की लोकेशन एटीएस तक पहुंची। हालांकि झिंझाना थाना अथवा जिले के किसी थाने में अब्दुल्ला का आपराधिक रिकार्ड मौजूद नहीं है।
कोई नहीं कर सका विरोध
झिंझाना में अब्दुल्ला को पकड़ने के लिए जब एटीएस और पुलिस की टीम पहुंची, तो तलाही मोहल्ले के काफी लोग घरों से निकलकर बाहर सड़क पर आ गए थे। भारी पुलिस बल मौजूद होने के कारण कोई भी पुलिस कार्रवाई का विरोध नहीं कर सका था। लोग यह जरूर पूछना चाहते थे कि अब्दुल्ला को क्यों पकड़ा जा रहा है।
अब्दुल्ला के भाई को दिए 10 रुपये :-
एटीएस टीम ने जब अब्दुल्ला को पकड़ा, तो उसका बड़ा भाई नफीस भी वहां आ गया। नफीस मानसिक रूप से बीमार है। उसे अपने पराये का कोई आभास नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक नफीस किसी से भी पैसे मांगने लगता है, जिसके चलते एटीएस टीम के एक सदस्य से भी उसने पैसे मांगे, तो उसे 10 रुपये का नोट दिया।
मदरसे के छात्र भी अनजान:-
तलाही मोहल्ले के जिस मदरसे में अब्दुल्ला पढ़ने जाता था, वहां पढ़ने वाले अन्य छात्र इस मामले से अनजान है। परिवार के लोगों का कहना था कि अब्दुल्ला कुरान शरीफ पढ़ रहा था, जबकि मदरसे के छात्रों का कहना था कि पूर्व में पढ़ाई कर चुका है। वहीं, कुछ लोगों ने बताया कि अब्दुल्ला ने कुछ समय के लिए इमाम के रूप में नमाज भी पढ़ाई थी, लेकिन अब वह कुछ नहीं कर रहा था। पिता हाजी रहीस के साथ ही वह राशन की दुकान से राशन वितरण के कार्य में सहयोग करता था।
पिता बोला, पता नहीं अब्दुल्ला को क्यों पकड़ा
अब्दुल्ला के पकड़े जाने पर उसके पिता हाजी रहीस परेशान दिखे। जब उनसे बातचीत की गई, तो बोले कि अब्दुल्ला तो सीधा सादा है, उसने कभी कोई अपराध नहीं किया, पता नहीं उसको क्यों पकड़ा गया है। वह भी अब्दुल्ला से मोबाइल फोन का ज्यादा प्रयोग करने पर टोकते थे, लेकिन वह मानता नहीं था।
अपर पुलिस अधीक्षक से मिले परिजन
बृहस्पतिवार सुबह जब एटीएस ने अब्दुल्ला को पकड़ लिया और टीम लौट गई, उसके बाद झिंझाना नगर पंचायत चेयरमैन हाजी सरफराज खां, खुर्शीद तथा अन्य लोगों के साथ परिजन शामली पहुंचे। अपर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार झा से मुलाकात की और प्रार्थना पत्र देकर कहा कि अब्दुल्ला ने कोई अपराध नहीं किया है, वह निर्दोष है, मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। अपर पुलिस अधीक्षक ने उनसे कह दिया कि मामले में स्थानीय पुलिस जांच नहीं कर रही है। उच्च सुरक्षा एजेंसी जांच में लगी है।