झिंझाना थाना क्षेत्र के गांव खानपुर कलां में महिला की मौत के मामले में तीन पत्रकारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने से पत्रकारों में रोष व्याप्त है। शनिवार को पत्रकारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
गांव खानपुर कलां में दो मार्च की रात में महिला गीता की हत्या हुई थी। तीन मार्च को सुबह इसकी सूचना मिलने पर पुलिस और पत्रकार गांव में पहुंचे थे, लेकिन तब तक परिजनों ने महिला के शव का अंतिम संस्कार कर दिया था। इसी दौरान एक दरोगा ने वहां मौजूद महिला के साथ अभद्रता की थी, जिसकी वीडियो भी वायरल हुई थी। इसके बाद चार मार्च को मामला प्रमुखता से प्रकाशित होने और दरोगा द्वारा अभद्रता करने की वीडियो न्यूज वायरल होने पर चार मार्च की शाम करीब पौने आठ बजे गांव मस्तगढ़ निवासी महिला के भाई ओमप्रकाश की तरफ से दी तहरीर के आधार पर नर्मदा, पवन, ओमपाल और विद्या के अलावा पत्रकार विनोद, पंकज चौहान और एक अन्य पत्रकार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। उसमें पत्रकारों को धारा 120 बी के तहत आरोपी बनाते हुए आरोप लगाया गया कि महिला के भाई ओमप्रकाश को बंधक बनाकर शव का जबरन दाह संस्कार करा दिया गया, जबकि पुलिस की मौजूदगी में ही पत्रकार वहां कवरेज करने गए थे। इसके बावजूद पत्रकारों को एफआईआर में नामजद किए जाने की वजह झिंझाना थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहे हैं तथा पत्रकारों में रोष व्याप्त है।
इसी को लेकर शनिवार को शामली में पत्रकारों की बैठक हुई, जिसमें पत्रकारों ने उत्पीड़न को लेकर नाराजगी जताई। इसके बाद पत्रकार ओमपाल सिंह, राव राफे खां, दिनेश भारद्वाज, लोकेश पंडित, राजपाल पारवा, नीरज भार्गव, राव राफे खां, दीपक वर्मा, आनंद प्रकाश, इकराम, अमित मोहन गुप्ता, प्रवीण वशिष्ठ, अजय बावरा, पंकज जैन, नदीम अहमद आदि सहित अन्य पत्रकारों ने एसडीएम शामली सुरजीत सिंह को ज्ञापन सौंपा। गौरतलब है कि इससे पूर्व में मेरठ से प्रकाशित एक समाचार पत्र के जिला प्रभारी राजपाल पारवा के खिलाफ भी जानलेवा हमले की रिपोर्ट शामली कोतवाली में दर्ज हुई, जबकि जलालाबाद निवासी पत्रकार केके वत्स के पुत्र के खिलाफ भी जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज हुई और शामली में ही मेरठ से प्रकाशित समाचार पत्र के कार्यालय पर हमला होने की घटना भी हो चुकी है।
पत्रकारों का नहीं होने देंगे उत्पीड़न : राणा
प्रदेश सरकार के गन्ना विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सुरेश राणा ने बताया कि पत्रकारों का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। यदि पत्रकारों के खिलाफ साजिश के तहत रिपोर्ट दर्ज हुई हैं, तो उन मामलों की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।