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गोशालाओं में ठंड में ठिठुर रहे गोवंश

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बाबरी क्षेत्र के गांव रधुनाथपुर गौशाला मृत पशु - फोटो : SHAMLI
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गोशालाओं में ठंड में ठिठुर रहे गोवंश
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शामली। कड़ाके की ठंड पड़ रही है। न्यूनतम तापमान छह डिग्री तक पहुंच गया है। हर कोई ठिठुर रहा है। गर्म कपड़ों में भी ठंड नहीं थम रही, ऐसे में जिले में बनी अस्थायी गोशालाओं में रहने वाले गोवंश भी बेहाल हैं। टीनशेड और तिरपाल के नीचे रह रहे गोवंश भी ठंड से ठिठुर रहे हैं। कुछ तो ठंड लगने से बीमार भी हो गए हैं। अमर उजाला ने जिले में इन अस्थायी गोशालाओं की पड़ताल की तो हकीकत सामने आई। पेश है एक रिपोर्ट -
नवीन मंडी में बीमार मिला एक गोवंश
नवीन मंडी में बनाई गई अस्थायी गोशाला में करीब 97 गोवंश हैं। नगरपालिका की तरफ से करीब 20 दिन पहले बनाई गई गोशाला की देखरेख रत्न एकता ट्रस्ट कर रहा है। ठंड से बचाने के लिए गोवंशों को सीमेंट की चादर वाले पक्के छह बरामदों में रखा गया है। हवा और ठंड रोकने के लिए रात में तिरपाल लगाया जाता है। इसके बाद भी गोवंशों को ठंड लग रही है। गोशाला की देखभाल करने वाले देवेंद्र सिंह ने बताया कि गोवंशों को ठंड से बचाने के लिए पूरी कोशिश रहती है। एक गोवंश ठंड लगने से बीमार है। उसका उपचार कराया जा रहा है।
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खेतों के बीच में बनी गोशाला
शहर के कुड़ाना रोड पर बनी गोशाला के चारों तरफ खेत हैं। करीब 55 गोवंश टीनशेड के नीचे बंधे हुए मिले। चारों तरफ तिरपाल लगाई गई थी। चारे में भूसा और हरे चारे के रूप में गन्ना खिलाया जाता है। यहां पर मौजूद कर्मचारी बिजेंद्र सिंह ने बताया कि उस समेत दो कर्मचारी देखभाल करते हैं। बिजेंद्र सिंह ने बताया कि सभी गोवंश ठीक हैं। जब किसी को ठंड लगती है तो पशु चिकित्सक से उपचार कराया जाता है।
वृहद गो संरक्षण केंद्र में जांच करते मिले चिकित्सक
वृहद गो संरक्षण केंद्र बनत की देखरेख की जिम्मेदारी रत्न एकता ट्रस्ट को दी गई है। गो संरक्षण केंद्र चलाने वाले दिनेश कुमार ने बताया कि यहां करीब 309 गोवंश हैं। ठंड से बचाने के लिए पक्के बरामदे में तिरपाल लगाया गया है। रात में गोवंशों को जूट की बोरी ओढ़ाई जाती है। केंद्र पर पशु चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. राजपाल वर्मा टीम के साथ गोवंशों की जांच कर रहे थे। उन्होंने बताया कि रोजाना गोवंशों की जांच की जाती है।
सिंभालका गोशाला में भी गोवंश बीमार
गांव सिंभालका में खेत के बीच में बनाई गई अस्थायी गोशाला में टीनशेड के नीचे करीब 65 गोवंश मिले। इनके चारों तरफ तिरपाल लगा था। इनमें एक गोवंश ठंड लगने से बीमार होना पाया गया। यहां मौजूद कर्मचारी सुनील कुमार ने बताया कि रोजाना पशु चिकित्सक गोवंश की जांच करते हैं और जो बीमार होता है, उसे दवा दिलवाई जाती है। ग्राम प्रधान अवनीश ने बताया कि सभी गोवंश ठीक हैं। पशु चिकित्सक की टीम जांच करने आती है।
गोशाला में ग्राम पंचायत निधि से हो रहा खर्च
झिंझाना। क्षेत्र के गांव बीबीपुर की अस्थायी गोशाला में 49 गोवंश हैं। ग्राम प्रधान श्याम सिंह का कहना है कि पहले 63 गोवंश थे, जिनमें से 14 को ग्रामीण पालने के लिए ले गए हैं। बाकी के लिए भूसा व गन्ने का अगोला चूरी आदि चारा दिया जा रहा है। डाक्टर अजय कुमार ने बताया कि क्षेत्र में रंगाना और बीबीपुर दोनों गोशालाओं के गोवंशों की नियमित जांच की जा रही है। बाबरी के मजरे रघुनाथपुर में दो गोवंश बीमार मिले। अस्थायी गो आश्रय स्थल में करीब 100 गोवंश मिले। ठंड में सभी गोवंशों को टीन शेड के नीचे तिरपाल लगाकर रखा जा रहा है। कर्मचारी करण सिंह ने बताया ठंड से बीमार गोवंशों का उपचार कराया जा रहा है।
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अस्थायी गो आश्रय स्थल में 3043 गोवंश संरक्षित
पशु चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के मुुताबिक जनपद में 40 अस्थायी गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं, जिनमें करीब 2405 गोवंश हैं। इनमें शामली ब्लाक में आठ, ऊन ब्लाक में नौ, कांधला ब्लाक में नौ, थानाभवन में नौ और कैराना ब्लाक में पांच अस्थायी गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इनके अलावा कैराना व शामली की गोशाला और बनत के वृहद गो संरक्षण केंद्र में 638 गोवंश हैं। इस तरह से जिले में कुल 3043 गोवंश संरक्षित किए गए हैं। अस्थायी गोशला जब से संचालित की जा रही है तब से 96 पशुओं की मौत हो चुकी है। हालांकि ठंड से किसी गोवंश की मौत नहीं होना बताया गया है।

बाबरी क्षेत्र के गांव रधुनाथपुर गौशाला में बंधे गौवंश- फोटो : SHAMLI

झिंझाना के गांव बीबीपुर मे गौशाला मे गौवँश।- फोटो : SHAMLI

झिंझाना के गांव बीबीपुर मे गौशाला मे गौवँश।- फोटो : SHAMLI

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