झिंझाना। मेरठ-करनाल हाईवे पर काठा नदी पुल के पास ट्रक की टक्कर से बाइक सवार छात्र की मौत हो गई, जिस पर लोगों ने बवाल कर दिया। गुस्साई भीड़ ने हाईवे पर जाम लगा दिया, पुलिसकर्मियों ने जाम खुलवाने का प्रयास किया, तो पथराव कर दिया। चर्चा रही कि भीड़ पर काबू पाने को पुलिस ने हवाई फायरिंग भी की। हालांकि पुलिस ने इससे इंकार किया है।
ग्रामीणोंं ने आरोप लगाया िक यदि पुलिस ने थोड़ी सक्रियता दिखाई होती तो आरोपी ट्रक चालक पकड़ा जाता। झिंझाना के मोहल्ला चंदनपुरी निवासी जुल्फिकार का बेटा अब्दुल्ला (17) कस्बा झिंझाना के ही इंटर कॉलेज में 12 वीं का छात्र था। मंगलवार शाम करीब साढ़े पांच बजे वह बाइक से मेरठ-करनाल हाईवे पर अहमदगढ़ की तरफ जा रहा था। जब वह काठा नदी पुल के पास पहुंचा, तो पीछे से आए अनियंत्रित ट्रक ने उसे टक्कर मार दी। अब्दुल्ला का सिर सड़क पर लगा और वह काफी दूर तक घिसटता चला गया।
इसके बाद चालक ट्रक लेकर मौके से फरार हो गया। हादसे के बाद मौके पर सैकड़ों लोग इकट्ठा हो गए। इसी दौरान अब्दुल्ला के परिजन भी वहां पहुंच गए। लहूलुहान छात्र को उठवाकर शामली के अस्पताल भिजवाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उधर, हादसे के बाद मौके पर इकट्ठा हुई भीड़ में गुस्सा भड़क गया। लोगों का कहना था कि पुलिस की लापरवाही के कारण ही आरोपी चालक ट्रक लेकर फरार हो गया है। आरोपी ट्रक चालक को गिरफ्तार कराने की मांग पर लोग हंगामा करने लगे और हाईवे पर जाम लगा दिया।
इसी बीच झिंझाना थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जाम खुलवाने का प्रयास करने लगी। पुलिसकर्मियों और भीड़ में टकराव हो गया। भीड़ में शामिल शरारती तत्वों ने पथराव कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने लाठी भांजकर हंगामा करने वालों को मौके से खदेड़ा। थानाध्यक्ष अवनीश गौतम भी सूचना पर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
छात्र अब्दुल्ला के परिजनों को सांत्वना देकर आरोपी ट्रक चालक के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्होंने हंगामा शांत कराया। उधर, चर्चा रही कि पुलिस ने भीड़ को काबू करने के लिए हवाई फायरिंग भी की। हालांकि सीओ झिंझाना आनंद वर्मा का कहना है कि हादसे के बाद हंगामा हुआ था, लोगों ने कुछ पत्थर फेंके थे, लेकिन पुलिस की तरफ से हवाई फायरिंग नहीं की गई। थानाध्यक्ष अवनीश गौतम ने भी हवाई फायरिंग से इंकार किया है।
चार बहनों का इकलौता भाई था अब्दुल्ला
हादसे में मारा गया अब्दुल्ला चार बहनों में इकलौता भाई था। उसकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। पिता जुल्फिकार मजदूरी करके परिवार को पालता है। अब्दुल्ला की मौत होने से परिवार में कोहराम मच गया। परिवार के लोगों का रो रोकर बुरा हाल हो गया। पीड़ित परिवार के यहां सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा।