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पर्यटन स्थल बनाने के दावे ज्यादा, अमल कम

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शामली श्री हनुमान धाम हनुमान टिल्ला - फोटो : SHAMLI
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- पर्यटन स्थल के रुप में विकसित होने का इंतजार कर रहे हैं जिले के ऐतिहासिक स्थल
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शामली। ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन के रुप में विकसित करने के खूब दावे किए जाते हैं, लेकिन ये दावे केवल वादों तक ही सिमटकर रह जाते हैं। जिले में कई ऐसे ऐतिहासिक स्थल हैं, जिन्हें पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने के खूब वादे हुए, लेकिन हुआ कुछ नहीं। थानाभवन के बूढ़ा बाबू तालाब और कैराना में देवी मंदिर में पर्यटन विभाग से विकसित करने का काम शुरू हुआ, लेकिन बजट के अभाव में बीच में ही लटका है। पर्यटन दिवस पर जनपद के ऐतिहासिक स्थलों की हालत पर रिपोर्ट...
उपेक्षित है इस्सोपुर टील का टीला
कांधला। कांधला क्षेत्र के इस्सोपुर टील गांव के यमुना खादर में सालों पुराना टीला है। गांव वाले मानते थे कि इस टीले में कई सभ्यताओं के रहस्य छिपे हैं। वर्ष 2002 में इसकी जानकारी मिलने पर थयोक्रेटिक जॉगरेफिक सोसायटी के वैज्ञानिक और स्थानीय निवासी उमर सैफ और मेरठ यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर रणधीर सिंह ने टीले पर जाकर काम किया। बकौल सैफ उन्होंने बारिश के बाद जब यमुना में बहकर आए कुछ अवशेषों को देखा तो उन्हें देखकर लगा कि ये चीजें किसी सभ्यता से जुड़ी है। उनकी सूचना पर पुरातत्व विभाग के तत्कालीन डायरेक्टर उत्खनन आरएस बिष्ट टीम के साथ यहां आए थे। उन्होंने वहां संक्षेप में खुदाई कराई तो मौके पर कुछ बर्तन, चित्रित मृदभांड आदि सामान मिला था। टीम ने संभावना जताई थी कि ये महाभारत, गुप्त, और सल्तनत काल के हो सकते हैं। पुरातत्व विभाग की टीम ने यहां पर विस्तृत खुदाई की जरूरत बताई थी, इसके बाद टीम चली गई लेकिन इसके बाद पुरातत्व या पर्यटन विभाग किसी से इस ओर ध्यान नहीं दिया। वर्तमान एमएलसी वीरेंद्र सिंह ने भी कई बार यहां खुदाई की मांग उठाई। प्रयास किए, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
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सड़क निर्माण के बाद हनुमान धाम की भी नहीं ली सुध
शहर के बीचों बीच बसा हनुमाधान धाम भी ऐतिहासिक यादों से जुड़ा है। हनुमान धाम के प्रधान सलिल द्विवेदी के अनुसार सालों पुराने इस मंदिर के बारे में कविदंति है कि महाभारत काल में हस्तिनापुर से कुरुक्षेत्र जाते हुए रास्ते में भगवान श्रीकृष्ण ने यहीं पर विश्राम किया था, लेकिन मंदिर के विकास के लिए पर्यटन विभाग द्वारा कोई प्रयास नहीं हुए। सपा सरकार के दौरान 2014 में शामली आए प्रदेश के पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने इस मंदिर में आकर पूजा-अर्चना की तो उन्होंने इसके विकास का भरोसा दिया था। मंदिर समिति ने यहां के पुराने पुराने तालाब आदि के जीर्णोद्धार और पर्यटन के रुपये द्वार के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव दिया था। बकौल द्विवेदी मंत्री ने इसे पर्यटन के क्षेत्र में विकसित करने का भरोसा दिया, लेकिन केवल मंदिर में 10 लाख के बजट से सड़क निर्माण कराया गया। इसके बाद कोई बजट नहीं आया। पिछले दिनों ही योगी सरकार ने इसे पर्यटन क्षेत्र में विकसित करने की घोषणा की है। लोगों को अब यहां के विकास का इंतजार है।
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