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बढ़ाने की जगह आधे कर दिए सर्किल रेट

Sun, 31 Jul 2016 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
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हाइवे के सर्किल रेट आधे - फोटो : प्रतीकात्मक
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शामली। दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन के अंतर्गत बनने वाले शामली बाईपास पर फिर अड़ंगा लग गया है। पूर्व में किसान सर्किल रेटों को कम बताकर उन्हें बढ़ाए जाने की मांग कर रहे थे। जिला प्रशासन ने संशोधित सर्किल रेट की रिपोर्ट शासन को भेजी, जिसे मंजूरी भी मिल गई। लेकिन यह किसानों के लिए घाटे का सौदा बन गई। दरअसल, किसानों को रिपोर्ट में सर्किल रेट बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन संशोधित रिपोर्ट में इन्हें घटाकर लगभग आधा कर दिया गया है। जिसकी वजह से किसानों ने अपनी जमीनों के बैनामे कराने बंद कर दिए हैं।
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दिल्ली-शामली, सहारनपुर यमुनोत्री राजमार्ग के तहत शामली बाईपास की जद में बनत, सहेटा, ताजपुर सिंभालका, बलवा, शामली गांव आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा नए सर्किल रेट से चार गुणा पैसा देकर किसानों की भूमि का बैनामा कराया जा रहा था। शामली बाईपास की कुल 36.6344 हेक्टेयर भूमि में से अभी तक 122 बैनामे करा 22.9529 हेक्टेयर भूमि खरीदने का कार्य पूरा हो पाया था।  बनत, सेहटा, शामली, बलवा, सिंभालका के तीस किसानों ने शासन को शिकायत भेजकर मौजूदा सर्किल रेटों को संशोधित करने की मांग की थी। उत्तर प्रदेश राज्य राज मार्ग प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी नवनीत सहगल ने डीएम सुजीत कुमार को सर्किल रेट की जांच करा संशोधित सर्किल रेट की सूची तलब की थी।

डीएम ने संशोधित सर्किल रेट की रिपोर्ट शासन को भेज दी थी, जिस पर शासन ने अपनी मुहर लगा थी। इन संशोधित सर्किल रेटों पर एक माह में मात्र तीस किसानों में से छह ने ही बैनामे कराए हैं। सेहटा के किसानों का कहना है कि उनका लिंक मार्ग का 85 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर पूर्व में सर्किल रेट था, किंतु शासन की संशोधित सूची में लिंक मार्ग का 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर और  बनत में जहां पूर्व में 1.9 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर भूमि का सर्किल रेट निधार्रित था, वहां संशोधित सर्किल रेट 70 लाख रुपये से लेकर 90 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है।
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यहां के किसान आबादी के रेट पर मुआवजा मांग रहे हैं। इसी तरह बलवा, सिंभालका, शामली के किसान गलत रेट मानकर बैनामा कराने से असहमत हैं। उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण के अवर अभियंता उमादत्त शर्मा ने बताया कि नई संशोधित सर्किल रेट की सूची में मुआवजा मूल्य घट गए हैं, जिसकी वजह से किसान जमीनों के बैनामे कराने नहीं आ रहे हैं। जिन किसानों की मुआवजा राशि बढ़ गई है, वह अपना बैनामा करा रहे हैं।
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