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चतुर्दशी तिथि आज दोपहर बाद 3:26 बजे होगी शुरू

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शामली। इस बार सावन मास की शिवरात्रि भद्रवास का दुर्लभ योग में मनाई जाएगी। शिवरात्रि की विशेष पूजा अर्चना, जलाभिषेक शुक्रवार सुबह चार बजे से लेकर दोपहर तक संपन्न होगा। दोपहर बाद 3:26 बजे त्रयोदशी और चतुर्दशी का मिलन होने से शिवरात्रि का विशेष संयोग बन रहा है।
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हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस बार श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि बृहस्पतिवार दोपहर 3.28 बजे से लेकर शुक्रवार दोपहर 3:26 तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी का प्रवेश होगा। चतुर्दशी तीन अगस्त शनिवार अपराह्न 3:50 बजे समाप्त होगी। ऐसे में शिवरात्रि दो अगस्त को मनाई जाएगी। इसी दिन शिव रात्रि की पूजा और व्रत किया जाएगा।
पंडित कुशलांनद ने बताया कि इस बार शिवरात्रि पर भद्रवास योग बन रहा है, जो बहुत दुर्लभ है। इस दौरान भद्रा स्वर्ग में ही वास करेगी। इस योग में शिव-पार्वती की पूजा करने से कई गुणा अधिक फल की प्राप्ति होती है। भद्रवास योग का निर्माण तीन अगस्त को दोपहर तीन बजकर 26 मिनट से शुरू होगा और रात तीन बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगा। शिवरात्रि पर्व के लिए मंदिर प्रबंधन कमेटियों द्वारा पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
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-ऐसे करें पूजा
पंडित प्रभुशकर शास्त्री ने बताया कि सावन शिवरात्रि के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें। फिर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर में या किसी मंदिर में जाकर भगवान शिव की पूजा करें। शिवलिंग का रुद्राभिषेक जल, घी, दूध, शक्कर, शहद, दही से करें। शिवलिंग पर बेलपत्र और श्रीफल चढ़ाएं। भगवान शिव की धूप, दीप, फल और फूल से पूजा करें। शिव की पूजा करते समय शिव पुराण, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक का पाठ करें। शाम के समय फलाहार ग्रहण करें।
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श्री शिव रात्रि पूजा के शुभ मुहूर्त
-ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4.19 से लेकर 5: 01 तक
- अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजे से लेकर 12.54 तक
- विजय मुहूर्त - दोपहर 2: 42 से लेकर 3: 36 तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 7:11 से लेकर 7: 32 तक
निशिद्ध मुहूर्त -2 अगस्त की रात्रि 12: 06 से लेकर 12: 49 तक
चतुुर्दशी तिथि शुरू 2 अगस्त 3.26 बजे से लेकर 3 अगस्त शनिवार सुबह 3.50 बजे तक रहेगी।
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