- शामली में हर महीने 900 से अधिक लोगों को काट और खरोंच रहीं बिल्लियां, वैक्सीनेशन में बड़ी लापरवाही
- शामली में बढ़ा पेट्स रखने का ट्रेंड, स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग ने जारी की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले में पालतू बिल्लियां रखने का शौक तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन पशुपालकों की एक बड़ी लापरवाही इंसानों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। बिना टीकाकरण (वैक्सीनेशन) के बिल्लियां पाली जा रही हैं, जिससे इंसानों में रेबीज फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। शहर के सरकारी पशु चिकित्सालय की पड़ताल में सामने आया है कि इलाज के लिए आने वाली हर 10 में से 6 बिल्लियां (60 प्रतिशत) बिना वैक्सीन की हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, यदि बिल्ली को एंटी-रेबीज टीका न लगा हो और वह इंसान को काट ले या खरोंच मार दे, तो रेबीज का संक्रमण फैल सकता है।
अस्पतालों के आंकड़े : हर महीने 900 से ज्यादा शिकार
जिला अस्पताल शामली : रोजाना 200 से अधिक लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं। इनमें से औसतन 60 मरीज केवल बिल्ली के हमले (काटने/खरोंचने) के शिकार होते हैं। बाकी मामले कुत्तों और बंदरों के होते हैं।
सीएचसी शामली : यहां हर दिन 40 से 50 मरीज रेबीज रोधी टीके लगवाने आते हैं, जिनमें करीब 10 मरीज बिल्ली और 7 से 8 मरीज बंदर के काटने से पीड़ित होते हैं।
केस स्टडी : ओपीडी जांच में खुली लापरवाही
केस -1 : कैराना रोड निवासी मनीष बुखार से पीड़ित अपनी पालतू बिल्ली को लेकर पशु अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने पूछा तो पता चला कि बिल्ली को आज तक एक भी टीका नहीं लगा है।
केस 2 : कैराना निवासी जावेद की बीमार बिल्ली की जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि उसे एंटी रेबीज की खुराक नहीं दी गई थी।
केस 3 : बामनौली के ग्रामीण बाबू की बिल्ली की जांच में भी वैक्सीनेशन शून्य पाया गया।
(पशु अस्पताल में रोजाना आने वाली 20 से 25 बिल्लियों के मामले बिना टीकाकरण के ही आ रहे हैं।)
इन्होंने कहा :
जिले में बिल्ली पालने का ट्रेंड बढ़ा है, लेकिन लोग वैक्सीनेशन को लेकर गंभीर नहीं हैं। बिना टीके वाली बिल्ली के काटने या खरोंचने पर इंसानों में रेबीज का जानलेवा खतरा हो सकता है। सभी पशुपालक बिल्ली लाते ही उसका नियमित टीकाकरण अवश्य कराएं। - डॉ. चंद्रभानू कश्यप, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, शामली
शामली में पालतु बिल्ली को दुलार करती युवती। स्रोत परिजन
शामली में पालतु बिल्ली को दुलार करती युवती। स्रोत परिजन