फिर टूटी मामौर झील, किसानों की फसलें जलमग्न
कैराना (शामली)। बुधवार रात मामौर झील फिर से ओवरफ्लो होकर टूट गई। झील का पानी मवी और मामौर के कई किसानों की सैकड़ों बीघा फसल में घुस गया। राजकीय उद्यान विभाग द्वारा बोई गई आलू बीज की 13 एकड़ फसल में भी पानी घुस गया है। करीब 15 लाख का नुकसान का अनुमान जताया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार बुधवार रात मामौर झील मवी से लगते टापू के पास से ओवरफ्लो होकर टूट गई। झील टूटने से मवी निवासी हरपाल की 5 बीघा गेहूं, मदन के सात बीघा ईख, जय कुमार की 12 बीघा पलेज, ईश्वरपाल की करीब 60 बीघा गेहूं, सरसों और ईख की फसल में पानी घुस गया। इसके अलावा सुखपाल की 8 बीघा गेहूं, दरयाब सिंह की 12 बीघा गेहूं, रामकरण की तीन बीघा गेहूं, तेलू की 8 बीघा गेहूं, शिवकुमार की 20 बीघा गेहूं, रामकुमार की 20 बीघा गेहूं, कवरपाल की 15 बीघा गेहूं, मेघराज की 15 बीघा गेहूं में पानी घुस गया है। मामौर निवासी संजय की करीब 110 बीघा गेहूं की फसल जलमग्न हो गई। किसानों को फसल खराब होने का खतरा सता रहा है।
मामौर झील टूटने से झील का पानी राजकीय उद्यान विभाग द्वारा 13 एकड़ जमीन में बोए गए आलू के बीज की फसल में भी घुस गया। राजकीय उद्यान विभाग शामली के उद्यान निरीक्षक एस आर वर्मा ने बताया कि 13 एकड़ भूमि पर विभाग द्वारा आलू के बीज की फसल तैयार की गई थी। पिछले 15 दिनों से हो रही बरसात के कारण आलू बीज की खोदाई नहीं हो सकी, क्योंकि बरसात के कारण मिट्टी गीली थी। ऐसे में यदि खोदाई की तो आलू बीज स्टोर में खराब हो जाता है। रात में झील टूटने से झील का पानी उनकी फसल में भी घुस गया, जिस कारण करीब आधी फसल खराब हो गई, जिसकी कीमत करीब 15 लाख रुपये है।
एसडीएम ने तहसील टीम के साथ पहुंचकर ली जानकारी
मामौर झील टूटने की सूचना पर एसडीएम देवेंद्र कुमार सिंह और तहसीलदार प्रवीण सिंह ने लेखपालों की टीम के साथ मामौर झील का निरीक्षण किया । झील टूटने से प्रभावित हुए किसानों के बारे में भी जानकारी ली। एसडीएम ने बताया कि मामौर झील की समस्या के समाधान के लिए जल निगम द्वारा जल्द ही वाटर ट्रीट प्लांट बनवाया जाएगा।
एक सप्ताह पूर्व भी टूटी थी झील
कैराना। कैराना से जाने वाले गंदे पानी के नाले और बरसात के दिनों में मामौर झील अक्सर ओवरफ्लो होकर टूट जाती है। एक सप्ताह पूर्व भी मामौर झील ओवरफ्लो होकर टूट गई थी। सबसे बड़ी स़मस्या झील के पानी की निकासी नहीं होना है।
जमीन नहीं मिलना भी समस्या
पिछले साल मामौर झील पर पहुंचे कमिश्नर संजय कुमार ने जल निगम को मामौर झील के पास वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के निर्देश दिए थे, ताकि झील का अधिक पानी साफ करके सिंचाई में प्रयोग किया जा सके, लेकिन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए करीब 13 बीघा उपयुक्त जमीन नही मिलने के चलते कार्य अधर में लटका है।
ैराना मामौर झील टूटने से राजकीय उद्यान के आलू के खतो में भरा पानी- फोटो : SHAMLI
शामली रेलवे स्टेशन पर खडी ट्रेन व यात्री- फोटो : SHAMLI