शामली। लगातार तापमान गिरने से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। रात में सड़कों पर आने जाने वाले लोगों के लिए प्रशासन द्वारा अलाव की व्यवस्था कराई गई है, लेकिन शहर में नगरपालिका द्वारा अलाव के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। शहर में करीब 10 स्थानों पर अलाव जलाए जा रहे है। अधिकतर स्थानों पर रात करीब 11 बजे तक ही अलाव जल रहे हैं। इसकी वजह लकड़ी खत्म होना बताया गया है। उधर, रैन बसेरा में मुुसाफिरों के लिए ठहरने की व्यवस्था तो है, लेकिन खाने और नाश्ते का कोई इंतजाम नहीं है, जबकि शासन के स्पष्ट निर्देश है कि रैन बसेरे में आने वाले लोगों के लिए खाने और नाश्ते की सुविधाएं उपलब्ध कराईं जाए। अमर उजाला टीम ने रात में साढ़े नौ बजे से साढ़े 10 बजे तक शहर के रैन बसेरों और अलाव की पड़ताल कर हकीकत जानी।
रात 9.30 बजे स्थान रोडवेज बस स्टैंड रैन बसेरा
नगरपालिका की तरफ से 21 नवंबर से शुरू किए गए रैन बसेरे में पानी, प्रकाश, बिस्तर, शौचालय व नहाने की व्यवस्था मिली लेकिन रसोई चालू नहीं मिली, जिसके चलते मुसाफिरों के लिए खाना और नाश्ते की व्यवस्था नहीं पाई गई। सोमवार रात को एक मुसाफिर दीपक निवासी शास्त्रीनगर मेरठ आराम करते हुए मिले। वह रात को 8.10 बजे वहां पहुंचे थे। उसने बताया कि वह झिंझाना में दवा लेने आए थे। तबियत ठीक न होने के कारण और बस न मिलने पर वह रात को यहां पर रुके हैं। उन्हें पानी, बिस्तर आदि की सुविधा मिली है। खाने के बारे में बताया कि वह झिंझाना में ही खाना खाकर चले थे। वहां मौजूद पालिका कर्मचारी शशिकांत ने बताया कि रैन बसेरे में 15 बिस्तर है। अब तक करीब 41 लोग रैन बसेरे में रात बिता चुके हैं।
रात 10.30 बजे स्थान नगरपालिका रैन बसेरा
रैन बसेरा में मुसाफिरों के लिए लगभग 20 बिस्तरों की व्यवस्था मिली। यहां पर ठहरने, नहाने, प्रकाश आदि की व्यवस्था पाई गई, लेकिन रसोई यहां भी चालू नहीं मिलने पर खाने और चाय आदि की व्यवस्था नहीं पाई गई। यहां पर एक मुसाफिर रामेश्वर सोते हुए मिले। उन्होंने बताया कि वे शामली में किसी काम से आए थे, लेकिन गांव जाने का साधन न मिलने के कारण रात बिताने के रैन बसेरा में आए हैं। पालिका कर्मचारी वसीम अहमद ने बताया कि 20 नवंबर को रैन बसेरा चालू हुआ था। अब तक करीब 55 लोग रैन बसेरे में आ चुके है। रविवार रात को चार मुसाफिर आए थे।
समय 9.40 बजे स्थान रोडवेज बस स्टैंड, अजंता चौक
यहां पर चमन सिंह, राजीव, नवीन समेत छह-सात लोग अलाव ताप रहे थे। निकट ही अलाव की लकड़ी बोरे में रखी हुई थी। चालक-परिचालकों ने बताया कि यहां पर रात में जब तक लोग रहते हैं, अलाव जलता रहता है। देर रात में बंद हो जाता है। यहीं हाल अजंता चौक का मिला। यहां पर अलाव ताप रहे रहीश निवासी आजाद चौक ने बताया कि वह दिल्ली रोड से घर जा रहा था। ठंड लगने की वजह से अलाव ताप रहा है। पास के दुकानदार नवीन ने बताया कि यहां पर देर रात में अलाव बंद हो जाता है।
समय 9.50 बजे, स्थान विजय चौक
यहां पर अलाव तो जल रहा था, उसके पास एक व्यक्ति लेटा हुआ ताप रहा था। अलाव की लकड़ी जलकर उस स्थिति थी, जिसे देखकर लग रहा था कि वह आधा घंटा और चलेगी। आसपास कहीं पर लकड़ी नहीं रखी थी।
समय 9.55 बजे फव्वारा चौक
यहां अलाव पर पुलिसकर्मी अनिल कुमार, बालाराम आदि पुलिसकर्मी अलाव ताप रहे थे। इसके साथ ही कैराना निवासी शखावत और आहिल भी चाय के साथ अलाव सेकते मिले। पुलिसकर्मियों ने बताया कि लकड़ी इतनी कम होती है कि रात को मुश्किल से 11 बजे के आसपास तक ही चल पाती है।
समय 10.05 स्थान सुभाष चौक
यहां पर अलाव पर होमगार्ड वेदपाल, राजकीन मिले। साथ ही एक मुसाफिर अलीगढ़ निवासी सत्यवीर भी अलाव ताप रहा था। सत्यवीर ने बताया कि वह अपनी लड़की के रिश्ते के लिए आया था। देर रात में ट्रेन से वापस जाएगा। होमगार्ड ने बताया कि लकड़ी कम रहती है, जो 11 बजे से पहले ही खत्म हो जाती है।
समय 10.15 बजे, स्थान गुरुद्वारा तिराहा
यहां दो पुलिसकर्मी अलाव पर ताप रहे थे, लेकिन यहां आग कम धुआं अधिक मिला। इसकी वजह गीली लकड़ी होना बताया गया। पास में दुकान करने वाले प्रदीप ने बताया कि लकड़ी आधी रात तक मुश्किल से चल पाती है।
समय 10.20 बजे, स्थान रेलवे स्टेशन
रेलवे स्टेशन परिसर में प्रकाश सिसौली, सुखपाल राझड़, रामपाल बड़ौत समेत आठ-दस यात्री अलाव ताप रहे थे। उनका कहना था कि लकड़ी खत्म हो चुकी है और जो जल रही है वह भी बंद होने वाली है। यहां पर रातभर यात्रियों का आवागमन रहता है, लेकिन आधी रात के बाद अलाव नहीं जलता।
शहर में इन स्थानों पर जल रहे अलाव
नगरपालिका शामली रैन बसेरा, अजंता चौक, विजय चौक, फव्वारा चौक, शिवमूर्ति सुभाष चौक, गुरुद्वारा तिराहा, रेलवे स्टेशन, नई मंडी गऊशाला, रोडवेज बस स्टैंड रैन बसेरा, गणेश चौक और अजुध्या चौक। गणेश चौक और अजुध्या चौक पर 15-15 किग्रा लकड़ी दी जा रही है जबकि अन्य स्थानों पर 20-20 किग्रा लकड़ी पालिका द्वारा अलाव के लिए प्रतिदिन दी जा रही है।
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कोट
शामली में अस्थाई रैन बसेरा बनाए गए है। इनमें रसोई की व्यस्था नहीं है। अगर किसी मुसाफिर को खाने और नाश्ते आदि की जरूरत है तो उसे होटल से उपलब्ध कराने के निर्देश कर्मचारियों को दिए गए हैं। अलाव के लिए पर्याप्त लकड़ी दी जा रही है। अगर कहीं पर कम पड़ रही है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
-सुरेंद्र सिंह, अधिशासी अधिकारी
शामली में रात्री 9.20पर रोडवेज बस अडडे पर रैन बसेरा में आराम करता युवक- फोटो : SHAMLI
शामली में फव्वारा चौक 9.33पर रात्री में अलाव सेकते पुलिसकर्मी- फोटो : SHAMLI
शामली रात्री 10.20रेलवे स्टेशन पर अलाव सेकते लोग- फोटो : SHAMLI
शामली रोडवेज बस अडडे पर रात्री 9.20पर अलाव सेकते लोग- फोटो : SHAMLI