‘जीवन में त्याग का नाम है भरत’
शामली, गढ़ीपुख़्ता। कसबे के मोहल्ला पूर्वी कश्यपपुरी में सोमवार को पंडित राकेश उपाध्याय ने श्रीराम कथा का वर्णन करते हुए कहा भरत का अर्थ जीवन में त्याग है, जिस राज के लिए केकैई ने दुनिया का अपयश अपने सिर पर लेकर ताज संभाल कर रख लिया। वो राज भरत ने मन की भांति त्याग दिया। अपने हक का त्याग करना ही रामायण है और दूसरे का हक छीनना ही महाभारत है। भरत ने श्रीराम को लाने के लिए गुरु वशिष्ट सहित समस्त प्रजा माता कौशल्या, सुमित्रा सहित वन में जाते हैं, लेकिन श्रीराम ने मर्यादा का आभास कराकर चरण पादुका को देकर अयोध्या में वापस भेजा। वहीं, सहारनपुर से आई कथावाचक की धर्मपत्नी सुलोचना देवी का सम्मान फूल माला, वस्त्र देकर किया। मनीष कश्यप ने इस दौरान डॉक्टर श्रीनिवास, सुशीला, माया, डा अशोक बागडी आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।