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Shamli News: पूरे सप्ताह मंदिर में बजे थे घंटे-घड़ियाल

Sat, 13 Jan 2024 01:40 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली। श्रीराम जन्म भूमि आंदोलन के दौरान 22 मार्च 1986 से लेकर पूरे सप्ताह जिले के सभी मंदिरों में घंटे-घडि़याल बजे थे। रामभक्तों ने महंतों से आशीर्वाद लिया था। 29 मार्च 1986 को भारत बंद का आयोजन किया गया था। भारत बंद शामली में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक रहा था।
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रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर जिले के लोगों में भी खुशी की लहर है। आंदोलन में शामिल रहे शामली के संघ कार्यकर्ता कांति राठी बताते हैं कि वह भी आंदोलन का हिस्सा रहे। रामजन्म भूमि मुक्ति के लिए वर्ष 1986 में मार्च माह में प्रदेश बंद का आह्वान किया गया। जिसको सफल बनाने के लिए शामली में बैठक हुई, जिसमें कार्यकर्ताओं ने बढ़ चढ़कर भागीदारी की थी। मंदिरोें में घंटे-घड़ियाल बजाने की जिम्मेदारी मुझे भी मिली थी।
22 से लेकर 29 मार्च तक मंदिर, गली-गली और घर-घर घंटे घड़ियाल बजाने का सफल कार्यक्रम विश्व हिंदू परिषद ने किया। मंदिरों में घंटे बजाने पर पुजारी तिलक लगा कर उन्हें आशीर्वाद देते थे। राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की कैराना तहसील की जिम्मेदारी उन्होंने संभाली। इसके बाद कारसेवकों को अयोध्या भेजने का कार्य शुरू हुआ। शामली में ऐसा माहौल बनाया गया। कारसेवकों को बाकायदा माला पहना कर उनके पीछे बड़ा जुलूस बाजार से निकाला जाता था। उधर, मुलायम सिंह यादव सरकार ने कारसेवकों को गिरफ्तार किया। स्कूल काॅलेज को अस्थायी रूप से जेल बना दिया गया। भाजपा, आरएसएस एवं विहिप और बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने लाठी- डंडे खाए। 50 कार्यकर्ताओं को नारे लगाते हुए थाने की तरफ रवाना किया। आज श्री रामजन्म भूमि में श्री राम मंदिर निर्माण का सपना पूरा होने जा रहा है। रामभक्तों के लिए इससे बड़ी खुशी की बात नहीं हो सकती।
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1984 को अयोध्या से शुरू हुई थी पैदल यात्रा
शामली। श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह की अयोध्या में व्यवस्था संभाल रहे विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र पंकज बताते हैं कि श्रीराम जन्म भूमि मुक्ति यज्ञ के लिए महंत बाबा अवैधनाथ को अध्यक्ष, मुरादाबाद के दाऊल दयाल खन्ना को महा सचिव और सचिव के रूप में राजेद्र पंकज की जिम्मेदारी दी गई। सबसे पहले बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की अयोध्या के सरयू तट पैदल यात्रा शुरू हुई। पैदल यात्रा अयोध्या से बजरंग दल की पैदल यात्रा लखनऊ से होकर गाजियाबाद पहुंची थी। 31 अक्तूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो जाने के बाद पैदल यात्रा स्थगित हो गई थी। बाद में बजरंग दल की पैदल यात्रा शुरू हुई थी। वर्ष 1989 में सबसे पहले साध्वी ऋतंबरा की शामली में देर रात्रि तक हुई सभा में राम भूमि आंदोलन को धार देने का किया गया।
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