शामली। जिले में शीतलहर और कोहरे को देखते हुए गेहू, सरसों, आलू, और गन्ने की फसलों में कीट/रोग से बचाने के लिए लक्षण अनुसार कीटनाशी/रोगनाशी का उपयोग करें। समय से फसलों की सिंचाई करें जिससे कि फसल पर पालें से बचाया जा सके।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी अमित कुमार ने बताया कि रबी की फसल गेहूं, सरसों, आलू, और गन्ने की फसलों में कीट रोग के लक्षण अनुसार कीटनाशी रोगनाशी का उपयोग करें। समय से फसलों की सिंचाई करें। वर्तमान में तापमान में गिरावट हो रही है और आर्द्रता बढ़ रही है। धूप नहीं निकलने से रबी फसलों में रोग की आशंका गहरा गई है। गेहूं फसल में माहू, पीली गेरूई, पत्ती धब्बा रोग की आशंका बनी हुई है। माहू रोग नियंत्रण के लिए एजडिरेक्टिन 0.15 ईसी 2.5 लीटर प्रति हैक्टेयर दर से 500 लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव किया जाए। पीली गेरूई रोग के नियंत्रण को प्रोपिकोन जोल 25 प्रतिलीटर ईसी 500 मिली प्रति हैक्टेयर 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जाए। पत्ती धब्बा रोग के नियंत्रण के लिए थयोफिनेट मिथाइल 70 प्रति डब्ल्यूपी 700 ग्राम को 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जाए। सरसों में आरामक्खी, पत्ती सुरंगक, पत्ती धब्बा और सफेद गेरूई रोग की आशंका बनी हुई है। इन रोगों की रोकथाम के लिए क्रमशः मैलाथियान, नीम आयल, मैंकोजेब और जिनेब की निर्धारित मात्रा को पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव किया जाए।
आलू की फसल कोहरे और शीतलहर से सबसे ज्यादा प्रभावित होती है, जिसमें झुलसा रोग प्रमुख है। इसके उपचार के लिए किसान मैंकोजेब अथवा जिनेब की 1.5 किग्रा मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर एक हैक्टेयर फसल पर छिड़काव करना चाहिए। गन्ना की फसल में टापबोरर अर्थात चोटीभेदक रोग लगने की आंशका रहती है। इससे बचाव के लिए ट्राइकोग्रामा किलोनिस की चिप को गन्ने की पत्ती पर लगा देने से कीट की रोकथाम होती है। इसके अलावा क्लोरपाइरीफास 20 प्रति लीटर ईसी 1.5 लीटर प्रति हैक्टेयर की दर से 600 लीटर में घोलकर फसल पर छिड़काव करना चाहिए। कीट रोग की रोकथाम के लिए 9452247111 और 94522557111 नंबरों पर संपर्क कर जानकारी ले सकते हैं।