संस्कृति के प्रति गंभीर रहकर जन-जन तक पहुंचाएं
शामली। विद्या भारती के ऑनलाइन आयोजित संस्कृति समागम में वक्ताओं ने संस्कृति को शाश्वत बताते हुए उसके प्रति गंभीर रहने तथा उसे जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। शामली में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज से प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों ने इसमें प्रतिभाग किया।
विद्या भारती के संस्कृति महासंगम में मुख्य वक्ता संस्कृति शिक्षा संस्थान के सचिव अवनीश भटनागर ने कहा कि भारत की संस्कृति महान एवं विश्व की प्राचीनतम संस्कृति है। संस्कृति में गिरावट नहीं आती बल्कि संस्कृति तो शाश्वत होती है, गिरावट हमारे व्यवहार में आती है। भारतीय संस्कृति स्थायी है। उसके मूल तत्व कभी नहीं बदलते। उसी के कारण हमारा अस्तित्व है। अत: हमें अपनी संस्कृति के प्रति गंभीर रहना चाहिए तथा उसे जन-जन तक पहुंचाना हमारा दायित्व है। अध्यक्ष विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष डा. ललित बिहारी गोस्वामी कहा कि कुरुक्षेत्र कर्मभूमि है। विद्वान मनीषियों ने अन्नदान से भी अधिक विद्यादान को प्रमुख माना है, लेकिन संस्कृति दान तो उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। हम क्या है, हमारा स्वरूप क्या है, हमारी परंपराएं क्या हैं, उनको जानना संस्कृति को जानना है। इसलिए हमें अपने अतीत की स्मृति को बनाए रखना है, जिससे भारतीय संस्कृति चिरस्थायी बन सके। विद्यालय के प्रधानाचार्य आनंद प्रसाद शर्मा ने संस्कृति ज्ञान परीक्षा की भूमिका बनाकर भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाने का प्रण लिया।