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बैंक के बाहर रात भर ठिठुरे, सुबह मिला ‘नो कैश’

Thu, 08 Dec 2016 12:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
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public news - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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झिंझाना। नोटबंदी होने के 30 दिन बाद भी देहात के हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं, ग्रामीण एक-एक पैसे के लिए परेशान हैं। उनके पास घर का खर्चा चलाने के लिए भी पैसा नहीं हैं।
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कड़ाके की सर्दी में लोग रात में ही बैंक के बाहर पहुंच बिस्तर लगाकर बैठ रहे हैं, ताकि उन्हें बैंक खुलते ही जरूरत के लायक पैसा मिल जाए, लेकिन रात भर बैंक के बाहर ठिठुरने के बाद भी उन्हें बैंक से कैश नहीं, बल्कि नो कैश का बोर्ड मिलता है। बैंक कर्मचारी ठीक से बात नहीं करते और पुलिस उन्हें धमकाकर भगा देती है।

मंगलवार रात भारतीय स्टेट बैंक शाखा के बाहर लोगों ने बिस्तर लगा लिया। पूरी रात रजाई और कंबल लेकर वहां बिता दी। सुबह सात बजते ही गांवों से आए अन्य ग्राहकों ने लाइन में आगे लगने का प्रयास किया, जिसको लेकर गांव सिकंदरपुर और बराला के ग्रामीणों में मारपीट हो गई।  दोनों पक्षों में लाठी डंडे चले, जिससे मौके पर अफरा तफरी मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस को देखकर झगड़ा करने वाले युवक वहां से फरार हो गए। 
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दस बजे शाखा खुलते ही          बैंक कर्मियों नो कैश का बोर्ड लगाने पर लोगों में आक्रोश फैल गया। लोगों ने हंगामा किया तो वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने उन्हें किसी तरह समझा बुझाकर              शांत कर घर वापस भेज दिया।

भारतीय स्टेट बैंक शाखा के  बाहर रात में बिस्तर लगाने वालों में नरेंद्र गांव जमालपुर, रामकुमार जंधेड़ी, शौकिंद्र, राजा, लांचू निवासी दरगाहपुर, ओमवती, मनदीप कौर डेरा संगतपुरा, भूरिया, मनसरीना निवासी पटनी आदि महिलाएं रात में ही बैंक शाखा के बाहर आकर जम गए थे। उनका कहना था कि अपने पैसों के लिए भी उन्हें इन           हालातों से गुजरना पडे़गा कभी नहीं सोचा था।

 घर में बच्चे बीमार हैं, उनकी दवाई तक के लिए पैसा नहीं है। खेतों में खाद और कीटनाशक तक के लाले पड़ गए हैं। गांवों में अब दुकानदारों से उधार लेकर घर का काम काम चल रहा था, लेकिन अब दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया है।
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