शामली/कैराना/चौसाना। यमुना में छोड़े गए पानी ने जिले भर में भारी तबाही मचा दी है। पिछले 24 घंटे में यमुना का जलस्तर 40 सेमी बढ़ गया है। यमुना किनारे के मंडावर, पढेड़, बल्हेड़ा, युसुफपुर चौतरा, साल्हापुर, नाईनंगला समेत एक दर्जन गांव के किसानों की सैकड़ों बीघा फसल फसल डूब गई है। तेज बहाव के कारण कटान भी लगातार हो रहा है। कटान रोकने के लिए मचान भी यमुना में बह गए हैं।
पहाड़ों पर बारिश के चलते पिछले सवा माह से यमुना में लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार सुबह नौ बजे हथनीकुंड ताजेवाला बैराज से यमुना में एक लाख 39 हजार 88 क्यूसेक पानी छोड़ दिए जाने के बाद यमुना का जलस्तर बढ़ने लगा था। शुक्रवार सुबह आठ बजे यमुना का जलस्तर 230 मीटर रिकार्ड किया गया था। देर शाम तक यमुना का जलस्तर 230.40 मीटर तक पहुंच गया है। शनिवार को जलस्तर 230.60मीटर तक पहुंच गया। कैराना यमुना पुल पर तैनात
केंद्रीय जल आयोग के पर्यवेक्षक अजयपाल सिंह ने बताया कि सहारनपुर जिले में यमुना का जलस्तर 230.90 मीटर पार कर चुका है, जबकि कैराना में खतरे की चेतावनी बिंदु 230 मीटर तथा खतरा का निशान 230.90 मीटर पर दर्ज है।
वहीं, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पहाड़ों पर बारिश जारी रही तो यमुना का जलस्तर खतरे का निशान पार कर जाएगा। यमुना का पानी बागपत, गाजियाबाद, दिल्ली में भारी तबाही मचा सकता है।
शनिवार दोपहर बाद यमुना का पानी बागपत, गाजियाबाद की ओर रुख कर गया। अधिक पानी छोड़े जाने से कैराना क्षेत्र के डूंडाखेडा, मवी-मामौर, मंडावर, पढ़ेड, बल्हेड़ा, युसुफपुर चौतरा, व उनके मजरे कलरी, साल्हापुर, नाईनंगला समेत यमुना किनारे कई गांवो के दर्जनो किसानों की सैकड़ों भूमि बह गई। कटान रोकने के लिए युसुफपुर चौतरा, कलरी, साल्हापुर गांवों में ड्रेनेज खंड द्वारा बनाए जा रहे मचान बह रहे हैं।
उधर शनिवार को हथनी कुंड बैराज पर यमुना के जलस्तर में भारी कमी आई है। सिंचाई विभाग के कंट्रोल रूम में शनिवार सुबह आठ बजे 31 हजार 342 क्यूसेक पानी पहुंच गया है। शाम पांच बजे जलस्तर 23 हजार 656 क्यूसेक रह गया है। हथनी कुंड बैराज से छोड़ गए यमुना नदी में पानी का रुख बागपत, गाजियाबाद, दिल्ली की ओर से बाढ़ का खतरा बन गया है।