मुजफ्फरनगर। प्रदेश के आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सक अब रोगियों का एलोपैथिक पद्धति से भी उपचार कर सकेंगे। उत्तर प्रदेश इंडियन मेडिसिन संशोधन विधेयक-2015 के अंतर्गत आयुष सचिव ने राज्यपाल की अनुमति के बाद इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। हालांकि उक्त चिकित्सक सर्जरी और मेडिकोलीगल नहीं कर सकेंगे।
जनहित को देखते हुए संयुक्त प्रांत भारतीय चिकित्सा अधिनियम 1939 में संशोधन कर निर्धारित एलोपैथिक दवाओं के प्रयोग की अनुमति दी गई है।वर्तमान में आयुर्वेद एवं यूनानी डॉक्टरों द्वारा अंग्रेजी दवाईयाें का प्रयोग करने पर शिकायतें और मुकदमें समस्या बन चुके थे। इन आदेशों से इन मुकदमें बाजी में भी राहत मिलेगी। नौ अक्तूबर को अधिसूचना आदेश जारी कर दिया गया है, जिसमें लिखी जाने वाली अंग्रेजी दवाओं का विवरण भी दिया गया है।
उप सचिव ऋषिकेश दूबे ने राज्यपाल के 09 सितंबर के आदेश संख्या 2224/79-बी-1-15-1(क) 18-2015 के अंतर्गत निदेशक आयुर्वेद और यूनानी सेवाएं को निर्देशित कर दिया है। आयुर्वेदिक तथा यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड के रजिस्ट्रार समेत सूबे के सभी डीएम को भी इसके आदेश जारी किए गए हैं।
नीमा के पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ शैलेंद्र गुप्ता ने कहा कि आयुर्वेद और यूनानी डॉक्टरों की चिकित्सा क्षेत्र में अहम भूमिका है। एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने की मांग डेढ़ दशक से की जा रही थी। नीमा अध्यक्ष डॉ अशोक गुप्ता, डॉ एमसी खत्री, डॉ के के शर्मा, डॉ एपी कुशल, डॉ डीएन गुप्ता, डॉ वीके टंडन, डॉ अंशु पोपली ने अंग्रेजी दवाओं कीस्वीकृति चिकित्सा व्यवस्था और बेहतर होगी।