शामली। नवरात्रों के छठे दिन माता के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की गई। शहर के मंदिरों में माता के अनुष्ठान किए गए। मां के दर्शन करने वालों की मंदिरों में भीड़ जुटी रही। उधर, मंगलवार को दुर्गा अष्टमी और नवमी एक दिन होने के बाद मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी, मगर नवरात्र का परायण और नवमी का त्योहार बुधवार को मनाया जाएगा।
रविवार को शहर के श्री हनुमान धाम, टंकी रोड स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर, मोहल्ला रेलपार मां दुर्गा-शिव मंदिर, बुढ़ाना रोड स्थित बलभद्र मंदिर, करनाल रोड पुरानी सब्जी मंडी स्थित मां शाकुंभरी देवी मंदिर, राजो मोहल्ला में मां चौदस वाला मां बालाजी सुंदरी मंदिर, गौशाला रोड पर सती मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। श्रद्धालुओं ने मां के समक्ष ज्योति प्रज्ज्वलित कर प्रसाद चढ़ाया। सुबह के समय घरों में मां कात्यायनी की विशेष पूजा अर्चना की गई।
इस मौके पर दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती, दुर्गा स्त्रोत का पाठ किया गया। हनुमान धाम पर दोपहर के समय कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें माता का गुणगान किया गया।
उधर, पंडित कुशलानंद शास्त्री ने बताया कि सोमवार को दोपहर एक बजे अष्टमी आ रही है, जो मंगलवार को दोपहर 11:20 बजे तक रहेगी। इसके बाद दोपहर 11:21 बजे से बुधवार को सुबह 10:04 बजे तक श्रीराम नवमी का योग बन रहा है। मंगलवार और बुधवार को अष्टमी-नवमी एक हो जाने के साथ मां गौरी के साथ सिद्धीदात्री का पूजन किया जाएगा। कुछ विद्वानों का मानना है कि नवरात्र पारायण बुधवार को होगा। श्रीराम जन्मोत्सव भी बुधवार को ही मनाया जाएगा।
श्रद्धालुओं ने किया मां का गुणगान
थानाभवन। नगर में नवरात्र के छठवें दिन माता कात्यायनी की पूजा अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर माता का गुणगान किया। मंदिरों में आरती की गई। श्रद्धालुओं ने दर्शन कर परिवार में सुख शांति की कामना की।
कथा सुनाते हुए बृजभूषण शर्मा ने कहा माता कात्यायनी की पूजा अर्चना करने से पिता के कुल की रक्षा होती है। मंदिर श्री मां शाकुंभरी भवन कचौरी नाथ में उन्होंने बताया कि मां कात्यायनी ने ऋषि की प्रसन्नता के लिए अपना अजन्मा स्वरूप त्याग कर पुत्री रूप में जन्म लिया। माता के इस रूप का गुणगान करने से माता की जल्द कृपा मिलती है। नगर के मंदिर श्रीदेवी भवन में शाम के समय महाआरती का आयोजन किया गया। वहीं, मंदिर बालाजी धाम, शाकुंभरी मंदिर अग्रवाल कॉलोनी, शिव मंदिर राजो की मोरी, मंदिर पंचतीर्थी, नारायण मंदिर आदि में भजन कीर्तन किया गया।