शामली। प्रधानमंत्री सिंचाई योजना का किसानों को लाभ देने के नाम पर गोलमाल करने के मामले में अधिकारियों के निर्देश पर दोषी पाए जाने पर जिला उद्यान अधिकारी ने प्रभारी सहायक लेखाकार को निलंबित कर दिया वहीं पूर्व योजना प्रभारी और डीलर को नोटिस दिया गया है।
अमर उजाला ने 13 मई के अंक में जिले में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना में बड़ा गोलमाल, जांच कराई, 14 मई को किसानों का खुद ही बनवा दिया फर्जी प्रमाणपत्र, जांच में खुलासा, 17 मई को किसानों के खेत में सिर्फ तीन पाइप लाइन बिछाईं, रुपये आते ही हटवाईं, 18 मई को अन्य लाभार्थियों की भी होगी जांच, विभाग ने की तैयारी नामक शीर्षक से प्रमुखता के साथ खबरें प्रकाशित की थीं।
खबरों के माध्यम से खुलासा किया था कि प्रधानमंत्री सिंचाई योजना का लाभ दिलाने के नाम पर जेहरा गांव के जग्गू, पृथ्वी सिंह, प्रकाश,सोनू समेत अन्य किसानों के यहां 32 से लेकर 30 हेक्टेयर जमीन दर्शाकर प्रत्येक से तीन से लेकर चार लाख रुपयों का गोलमाल किया गया था। किसान थे ओबीसी मगर अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर योजना का लाभ लिया था। उक्त किसानों के खातों में योजना की राशि आ गई थी, जिन्हें बाद में विभागीय अधिकारियों, डीलरों की मदद से किसी अन्य के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया था।मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार तिवारी ने मामले की जांच की थी तो 21.71 लाख रुपये का संदिग्ध लेनदेन मिला था।
जिला उद्यान अधिकारी सतेंद्र मान ने बताया कि इस मामले में विभाग के कनिष्ठ सहायक और प्रभारी सहायक लेखाकार सचिन कुमार द्वारा फर्जीवाड़ा कर पहले किसानों को लाभ दिलाने फिर रुपये ट्रांसफर कराने की बात सामने आई। सीडीओ की रिपोर्ट के बाद सचिन को अब निलंबित कर दिया गया है। जबकि गोलमाल के लिए जिम्मेदार पूर्व योजना प्रभारी नरेश कुमार और डीलर आशीष कुमार को नेाटिस जारी किया गया है। उनके खिलाफ भी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
मुख्य विकास अधिकारी का कहना है कि धोखाधड़ी, गोलमाल किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- जिले में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना में बड़ा गोलमाल, जांच कराई - 13 मई
- 17 मई को किसानों के खेत में सिर्फ तीन पाइप लाइन बिछाईं, रुपये आते ही हटवाई
- 18 मई को अन्य लाभार्थियों की भी होगी जांच, विभाग ने की तैयारी
यह था मामला
वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत ऊन, जेहरा क्षेत्र के किसानों ने जिला उद्यान विभाग में आवेदन किया था। बाद में कई किसानों ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी से शिकायत की थी कि कुछ विभाग के कर्मचारियों, अधिकारियों ने उनके फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर पहले तो उनके खाते में रुपये डलवाए, बाद में उन्हें किसी अन्य खातों में ट्रांसफर करा दिया। जांच में पता चला कि उन्हें ओबीसी के बजाय अनुसूचित जाति का दर्शाया गया है। जिलाधिकारी के आदेश पर मुख्य विकास अधिकारी को मामले यी जांच सौंपी गई थी। अब इस मामले में कार्रवाई की गई है।
कई अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय
शामली। इस मामले में विभागीय अधिकारियों ने कनिष्ठ सहायक और प्रभारी सहायक लेखाकार सचिन कुमार पर तो कार्रवाई कर दी है जबकि दो अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। लोग यह भी आरोप लगा रहे हैं कि संबंधित विभाग के अधिकारी की मिलीभगत के बिना यह खेल संभव नहीं है। यदि ऐसा हो भी गया था तो फिर विभागीय अधिकारियों ने आलाधिकारियों को मामले से अवगत क्यों नहीं कराया? माना जा रहा है कि मामले में अभी अन्य पर भी गाज गिरना तय है। स्थानीय अधिकारी शासन के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। उधर, सचिन ने आरोप को बेबुनियाद बताया। कहा कि उसे जान बूझकर फंसाया गया है।