कांधला। नगर पालिका के लिपिक को पकड़ने के लिए एंटी करप्शन की टीम ने पिछले दस दिन से जाल बिछाया हुआ था। लिपिक का विवादों से भी पुराना नाता रहा है।
वर्ष 2012 में उन्होंने लिपिक पद पर रहते हुए लेखाकार का वेतन प्राप्त करना शुरू कर दिया था। जिसका पता चलने पर तत्कालीन सभासदों ने मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों को की थी। जिसके बाद अकरम अंसारी से छह माह के अतिरिक्त वेतन की रिकवरी की गई थी। रिकवरी होने के बाद मामला चर्चाओं में आने पर एक सभासद के द्वारा थाने पर तहरीर देते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी, जिसमें अकरम बाबू को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। बाद में मामले का निपटारा हो गया था।
मार्च 2022 में वार्ड नंबर तीन से निर्वाचित सभासद स्व. दीपक सैनी ने लिपिक अकरम अंसारी पर आधार कार्ड में नाम परिर्वतन फॉर्म पर बिना जांच के सत्यापन किए जाने और फर्जी हस्ताक्षर व मोहर लगाने का आरोप लगाया था। जांच में आरोपों में सत्यता पाएं जाने के बाद गिरफ्तारी के बाद अकरम अंसारी को सस्पेंड कर दिया गया था।
पूर्व में पकड़ में आ चुके रिश्वत के मामले
करीब दो माह पहले ही विकास भवन के लिपिक को भी एंटी करप्शन ने तीस हजार की रिश्वत के साथ पकड़ा था। जिसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। बाद में आरोपी को सस्पेंड भी किया गया था। इसके अलावा बीएसए कार्यालय के बाबू को भी सात माह पहले एंटी करंप्शन की टीम ने पकड़ा था। इससे पहले एक लेखपाल को भी रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा था।