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Shamli News: जिले में लगातार बढ़ रहे एड्स रोगी, जागरुकता ही बचाव

Sat, 30 Nov 2024 10:44 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली। जिले में लगातार एड्स रोगी सामने आ रहे हैं। जिला अस्पताल में इस साल में अब तक 48 और सीएचसी शामली में 75 नए केस मिले हैं। इनमें अधिकतर श्रमिक और ट्रक चालक हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एड्स रोगी नियमित रूप से दवा लेता है तो वह लंबे समय तक सामान्य लोगों की तरह अपनी जीवन गुजार सकता है। उनका कहना है कि जागरुकता और सकारात्मक सोच ही एड्स से बचाव है।
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हर वर्ष एक दिसंबर का दिन विश्व एड्स दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को एड्स से बचाव के प्रति जागरूक करना है। जिला अस्पताल और सीएचसी में एकीकृत परामर्श जांच केंद्र चल रहा है। जिला अस्पताल एकीकृत परामर्श केंद्र की काउंसलर अंशु तोमर ने बताया इस साल में जनवरी से अब तक लगभग 5472 जांच हुई है, जिनमें 48 मरीजों में एड्स की पुष्टि हुई है। इनमें 12 महिलाएं और दो बालक 12 व 11 साल के शामिल हैं। सभी महिलाएं घरेलू हैं।
उधर, सीएचसी पर एकीकृत परामर्श केंद्र की काउंसलर दीपा चौहान ने बताया कि इस साल में अब तक लगभग आठ हजार जांच हुई, जिनमें 75 नए एड्स रोगी मिले हैं, जिनमें 25 महिलाएं हैं। ज्यादातर रोगी श्रमिक वर्ग से है। उनका कहना है कि मरीजों की काउंसिलिंग कर एड्स से बचाव के लिए जागरूक किया जाता है। जागरुकता और सकारात्मक सोच ही एड्स से बचाव है। उनका कहना है कि लक्षण नजर आते ही लोगों को जांच करानी चाहिए। जांच में पुष्टि होने पर दवा लेनी चाहिए।
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इस तरह के आ रहे केस
केस एक : सीएचसी के एकीकृत परामर्श जांच केंद्र पर दवा लेने आए व्यक्ति ने बताया कि दो साल पहले उसकी पत्नी को काला पीलिया हुआ था। जांच में पत्नी को एड्स की पुष्टि हुई। इसके बाद उसकी जांच हुई तो वह भी एचआईवी पॉजिटिव मिला। वे दोनों सामान्य जीवन बिता रहे हैं। उनके तीनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ है।
केस दो : 35 वर्षीय युवक ने बताया कि 2016 में हुई जांच में उसे एड्स के बारे में पता चला था। इसके बाद से वह दवा ले रहा है। उसे किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है, वह सामान्य जीवन यापन कर रहा है। उसने बताया कि उसके दोनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ है।
लिंक एआरटी सेंटर में चल रहा 250 मरीजों का उपचार
सीएचसी शामली पर लिंक एआरटी सेंटर है। जांच में एड्स की पुष्टि होने पर पहले छह महीने मुजफ्फरनगर एआरटी सेंटर से दवा मिलती है। इसके बाद सामान्य होने पर रोगी को लिंक एआरटी सेंटर से दवा दी जाती है। काउंसलर दीपा चौहान ने बताया कि करीब तीन साल पहले हुए जिले में हुए सर्वे में लगभग 1500 एड्स रोगी होने की संभावना जताई गई थी। इनमें लगभग एक हजार रोगियों का उपचार चल रहा है। इनमें से 250 मरीजों को लिंक एआरटी सेंटर से दवा दी जा रही है, जबकि 750 मरीजों को एआरटी सेंटर मुजफ्फरनगर से दवा दी जा रही है।
लक्षण
-मांसपेशियाें व जोड़ों में दर्द रहना।
-त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते होना।
- गले में खराश और मुंह में घाव होना।
- रात को पसीना आना व सूखी खांसी होना।
- लगातार बुखार होना।
- जी मिचलाना, उल्टी दस्त होना।


छूने, साथ रहने व खाने से नहीं फैलता एड्स
कांउसलर अंशु तोमर ने बताया कि एड्स किसी को छूने, साथ रहने व साथ खाने से नहीं फैलता। यह संक्रमित व्यक्ति की सूई लगाने, असुरक्षित यौन संबंध बनाने, नशे के लिए इंजेक्शन लगाने में एक सूई का इस्तेमाल करने, टैटू बनाने में एक ही सूई का इस्तेमाल करने आदि से होने की आशंका रहती है।
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