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सीएचसी प्रभारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि

Tue, 09 Jan 2018 12:19 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली
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meeting - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। सरकारी विभागों की पीड़ा होती है कि शासन से धनराशि नहीं मिल रही, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ऐसा है कि जिसे पैसा भी खूब मिल रहा है, लेकिन खर्च नहीं कर पा रहे हैं। अस्पताल की साफ सफाई और संसाधनों में इजाफे के नाम पर मिल रही धनराशि तक खर्च नहीं हो रही है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने फटकार लगाई और दो सीएचसी प्रभारी को प्रतिकूल प्रविष्टि तक दे दी गई है।
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सोमवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक हुई। उसमें डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने सिलसिलेवार हर योजना की समीक्षा की। उसमें सबसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए विभिन्न मद में प्राप्त हुई धनराशि के खर्च की समीक्षा की गई, तो प्रगति संतोषजनक नहीं मिलने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। इस दौरान बताया गया कि कैराना और कांधला सीएचसी ने दिसंबर माह के अंत तक सफाई कार्य के लिए मिली धनराशि भी खर्च नहीं की है। इन दोनों ही सीएचसी के प्रभारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि देने का आदेश डीएम ने किया। थानाभवन सीएचसी ने एक लाख 87 हजार में से सिर्फ एक लाख 44 हजार रुपये ही दिसंबर माह तक खर्च किए।

वहीं, कुड़ाना सीएचसी के मिले ढाई लाख रुपये में 57 हजार रुपये खर्च दर्शाया गया, जबकि यह सीएचसी नई बनी है। इस पर जिलाधिकारी ने जांच कराने का आदेश दिया। इसके अलावा जननी सुरक्षा योजना में 12030 महिलाओं में से 10764 को ही सरकार की तरफ से मिलने वाली धनराशि का भुगतान किया गया, जबकि 1266 का भुगतान लंबित है। जिलाधिकारी ने कहा कि योजना में शत प्रतिशत पात्रों को भुगतान दिलाना सुनिश्चित किया जाए। सीएमओ को निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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इस दौरान सीएमओ डॉ. राजकुमार सिंह, एसीएमओ डॉ. सफल कुमार, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. नेतराम, डॉ. रमेश चंद्रा, डॉ. भानू प्रकाश आदि सहित सभी सीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारी मौजूद रहे।
प्राइवेट अस्पताल नहीं दे रहे प्रसव की सूचना ः जिले में घर पर प्रसव का ग्राफ घटा है, जबकि सरकारी अस्पताल में प्रसव की संख्या बढ़ रही है।

इस साल में अब तक 2751 प्रसव घर पर हुए, जबकि बीते वर्ष 4100 हुए थे। वहीं, इस साल 12030 प्रसव सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर हुए। वहीं, प्राइवेट अस्पतालों में सिर्फ 221 प्रसव का आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के पास तक पहुंचा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्राइवेट अस्पताल संचालक प्रसव की सही सूचना नहीं भेज रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जो अस्पताल प्रसव की सूचना नहीं भेजते हैं, उनका लाइसेंस नवीनीकरण नहीं होगा तथा लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।
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