जलालाबाद में आलुओं की खुदाई करते मजदूर।
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जलालाबाद। बाजार की मंदी ने आलू उत्पादक किसानों को परेशानी में डाल दिया है। आलू उत्पादन पर जितना खर्चा आ रहा है, उसकी आधी रकम भी किसानों को नहीं मिल रही। जलालाबाद क्षेत्र में सैकड़ों किसान आलू उत्पादन करते हैं। इस साल भी करीब 20 हजार बीघा में आलू की फसल बोई गई। अब खेतों में आलू की खुदाई शुरू हो गई है और फसल को मंडी ले जाकर बेचा जा रहा है, लेकिन मंडी भेजे गए आलू की कीमत खर्च से भी आधी मिलने के कारण किसानों में मायूसी बनी हुई है।
किसानों का कहना है कि मंडी में आलू की 50 किग्रा की बोरी केवल 150 से 200 रुपये में बिक रही हैं, जबकि 50 किग्रा आलू उत्पादन पर बुआई से लेकर खुदाई, भराई और ट्रांसपोर्ट मिलाकर करीब 300 रुपये तक का खर्च आ रहा है। किसान चौधरी असलम अहमद, अफजल मलिक, महबूब चौधरी, नरेंद्र कुमार नांगल, जयवीर आर्य दखौड़ी जमालपुर आदि का कहना हैं कि जब बुवाई के लिए आलू का बीज खरीदा था, तो 1500 रुपये का कट्टा मिलता है। उसके बाद निराई, गुड़ाई में लगभग 8000 रुपये प्रति बीघा का खर्च आ जाता हैं।
पाला, ओलावृष्टि तथा बरसात से काफी फसल का नुकसान होता है। प्रति बीघा लगभग 20 से 25 क्विंटल आलू का उत्पादन हो रहा है। किसान उपेंद्र गुप्ता, बबलू सैनी आदि का कहना है कि किसान की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं हैं कि वह आलू को स्टोर करके रख सके। अब किसान को आलू खरीद के लिए व्यापारी भी नहीं मिल पा रहे हैं। आलू उत्पादन करना किसानों के लिए घाटे का सौदा हो रहा है।