शामली। विधानसभा चुनाव है, प्रत्याशी भी खुलकर मैदान में आ चुके हैं। भारत निर्वाचन आयोग भी सख्त है। नया है तो इस बार प्रचार करने का तरीका। प्रत्याशियों के खर्च पर निगाह गड़ाए बैठे आयोग के कारण इस बार प्रत्याशियों ने सोशल मीडिया को प्रचार का अड्डा बनाया है। जिस पर प्रत्याशी अपनी दिनभर की हरेक एक्टिविटी को लोड कर रहे हैं।
देश में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव है। उत्तरप्रदेश में पहले चरण में 11 फरवरी को मतदान होना है। इसी के चलते सभी प्रत्याशियों ने अपना प्रचार शुरू कर दिया है, लेकिन इस बार भारत निर्वाचन आयोग बहुत सख्त नजर आ रहा है। आयोग द्वारा भेजा गया व्यय पर्यवेक्षक की नजर हरेक प्रत्याशी द्वारा किए जाने वाले खर्च पर है। यही कारण है कि इस बार न कही बिल्ले दिख रहे हैं और न पोस्टर, लेकिन इस बार प्रत्याशियों ने प्रचार का माध्यम ही बदल लिया है।
शामली जिले का कोई भी प्रत्याशी हो, सोशल मीडिया पर जमकर प्रचार करा रहा है। गांव में जाकर वोट मांगने की बात हो या फिर अपने मन की बात साझा करने का मामला हो, बड़े बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने तक की बात को प्रत्याशी सोशल मीडिया के माध्यम से जनमानस तक पहुंचा रहा है।
सोशल मीडिया पर हो रही चुुनाव को लेकर गर्म बहस ः तमाम ग्रुपों में प्रत्याशियों के लोग जुड़े हैं। इस कारण ग्रुप पर दो पक्षों में अपने अपने प्रत्याशी को लेकर बहस भी छिड़ रही है। यही नहीं कुछ ग्रुप पर माहौल बिगाड़ने के लिए भी अनर्गल पोस्ट की जा रही है। जिस कारण अक्सर बहस शुरू हो जाती है। जिसके कारण बड़ा विवाद हो सकता है।
पुलिस भी रख रही है नजर
भारत निर्वाचन आयोग के आदेश पर सोशल मीडिया पर चल रहे प्रचार तथा अनर्गल बहस और आपत्तिजनक टिप्पणी पर कड़ी नजर रखी जा रही है। सूत्रों के अनुसार पुलिस की शामली में चल रहे व्हाट्सऐप ग्रुप पर नजर है। स्वयं कप्तान इस पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।
वहीं, एसपी डॉ. अजयपाल शर्मा ने बताय कि सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है। यदि किसी प्रकार कोई अनर्गल बहस या आपत्तिजनक टिप्पणी की गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रचार का मुफ्त, सुलभ साधन बनी सोशल मीडिया
शामली जनपद में तीनों विधानसभाओं पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के सामने इस बार सोशल मीडिया प्रचार का मुफ्त और सुलभ साधन बनकर सामने आई। इसमें फेसबुक से लेकर व्हाट्सऐप का अधिकतर प्रयोग किया जा रहा है। प्रत्याशी अपना ग्रुप बनाकर उस पर पोस्ट करता है और उस पोस्ट को सैकड़ों लोग शेयर करते हैं। इसमें प्रत्याशी का अधिक खर्च नहीं होता है।