कैराना। यमुना में स्नान का विशेष महत्व रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भूमि को उपजाऊ बनाने में यमुना का बड़ा योगदान रहा है। मगर आज यमुना अपने अस्तित्व को लेकर सूखे से जंग लड़ रही है। यमुना में पानी न होने के कारण श्रद्धालुओं की आस्था भी टूट रही है। ऐसे में अमावस्या पर होने वाले स्नान के संबंध में भी अभी तक प्रशासन द्वारा कोई तैयारी नहीं की गई।
पानी नहीं होने के कारण यमुना का हाल अब बेहाल हो चुका है। आलम यह है कि दूर-दूर तक भी नदी में कहीं पानी की बूंद नजर नहीं आ रही। वहीं, लोग औद्योगिक कचरे, सिल्ट, पॉलीथिन डालकर यमुना को मैली कर रहे हैं। यमुना में अचानक जल संकट से लोग चिंतित हैं। गंभीर बात यह है कि यमुना के इस हाल पर न तो प्रदेश सरकार का ध्यान है और न ही सिंचाई विभाग गंभीर है। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर यमुना नदी में स्नान करने गए श्रद्धालु पानी की हालत देख लौट गए थे। ऐसा पहले भी कई बार हुआ है। प्रशासन को इसकी खबर भी होती है, लेकिन कोई तैयारी नहीं की जाती। मंगलवार को अमावस्या के अवसर पर स्नान है। हर साल सैकड़ों श्रद्धालु यमुना नदी में स्नान करने आते है, लेकिन इस बार यमुना नदी में पानी नहीं है। ऐसे में श्रद्धालुओं का निराश लौटना पड़ेगा। यमुना ग्राम सेवा समिति के लोगों ने यमुना नदी में लोगों की आस्था को देखते हुए पानी छुड़वाने की मांग की है।