दिल्ली यमुनोत्री हाईवे की मरम्मत उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण (उपसा) कराएगा। इस पर 12 करोड़ 73 लाख रुपये खर्च होंगे, जिसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है। मरम्मत से पूर्व शासन के निर्देश पर एक कमेटी स्थलीय निरीक्षण करेगी, जिसके बाद मरम्मत का कार्य शुरू होगा। वहीं, उपसा के गाजियाबाद से संचालित कार्यालयों को सहारनपुर में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है।
उपशा के अफसरों का कहना है कि दिल्ली-यमुनोत्री मार्ग को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) में शामिल कराने के लिए भी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन उसमें अभी करीब एक साल का समय लग जाएगा। वहीं, वर्तमान में दिल्ली से लेकर सहारनपुर तक इस मार्ग की हालत खस्ता है। बागपत से लेकर शामली और सहारनपुर तक जगह-जगह गड्ढे हैं, जिसके चलते इसकी मरम्मत होनी बेहद जरूरी हो गई है।
उपशा के महाप्रबंधक एसके अवधिया का कहना है कि गाजियाबाद, बागपत, शामली, सहारनपुर जिले के क्षेत्र में दिल्ली-यमुनोत्री हाइवे की मरम्मत के लिए 12 करोड़ 73 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि शासन की एक टीम दिल्ली बॉर्डर से लेकर गाजियाबाद, बागपत-शामली, सहारनपुर जिले की सीमा 208 किमी तक मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण कर मरम्मत कार्य पर खर्च होने वाली धनराशि का निर्धारण करेगी। आगामी 15 जून तक शासन की टीम निरीक्षण करने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजेगी। उपशा के महाप्रबंधक (तकनीकी) अतुल शर्मा ने बताया कि दिल्ली-यमुनोत्री मार्ग को एनएचएआई में जाने के लिए कम से कम एक साल लगेगा।
शामली बाईपास की प्रक्रिया भी लटकी
दिल्ली यमुनोत्री हाईवे के तहत ही शामली बाईपास का निर्माण भी होना है। उसके लिए भूमि खरीदने की प्रक्रिया चल रही थी, जिसके तहत करीब 80 प्रतिशत भूमि के बैनामे हो चुके हैं, लेकिन फोरलेन निर्माण कराने वाली एजेंसी एसईडब्लू का टेंडर निरस्त होने और इस मार्ग को एनएचएआई को भेजने की प्रक्रिया के बीच बाईपास निर्माण का मामला भी अधर में लटक गया है। उपशा के महाप्रबंधक (तकनीकी) अतुल शर्मा ने बताया कि भूमि खरीदने और बैनामों की प्रक्रिया पूूरी करने के लिए शासन से गाइड लाइन जारी होने पर ही कोई निर्णय लिया जाएगा।