शामली। किसानों की फसलों का उत्पादन प्रकृति पर ही निर्भर करता है। इस बार बाढ़ से लेकर बारिश ने भी लोगों की फसलों को जहां नुकसान पहुंचाया, वहीं घरों के गिरने के कारण कई लोग बेघर भी हो गए। अभी भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ के कारण जिलेभर में किसानों की धान, ज्वार, गन्ना, सब्जी की करीब 794 फसलें डूबीं। वहीं शामली, ऊन और कैराना तहसील क्षेत्र में 174 लोगों के मकानों में नुकसान हुआ है। प्रशासन द्वारा कराए गए प्राथमिक सर्वे में यह बातें निकलकर सामने आई है। हालांकि, फसलों का सर्वे अलग अलग तहसील क्षेत्रों में किया जा रहा है।
- इतनी मिलेगी सरकार की राहत
किसानों को 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेगी क्षतिपूर्ति
- कम से कम दो हजार रुपये नुकसान पर मुआवजा
- ज्यादा से ज्यादा 17 हजार प्रति हेक्टेयर
चार सदस्य टीम करेगी फसलों के नुकसान का सर्वे
अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि कृषि, राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ अपने कार्यालय में समीक्षा की। एडीएम ने तहसीलवार बाढ़ से प्रभावित फसलों के नुकसान के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ में 794 हेक्टेयर फसलें प्रभावित हैं। एडीएम ने प्रभावित क्षेत्र में मुआवजे के लिए दोबारा सर्वे करने के लिए चार सदस्य टीम बनाई। टीम में एसडीएम, तहसीलदार, विकास खंड, कृषि विभाग के अधिकारी शामिल रहेंगे।
- कैराना में हुआ सबसे अधिक नुकसान, 584 हेक्टेयर फसल हुई बर्बाद
प्रशासन द्वारा कराए गए प्राथमिक सर्वे में सामने आया कि शामली तहसील क्षेत्र में किसी भी किसान की फसल बाढ़ के कारण बर्बाद नहीं हुई। जबकि कैराना में 584 हेक्टेयर और ऊन में 210 हेक्टयर किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं।
शामली में गिरे सबसे अधिक 97 कच्चे मकान
एडीएम ने बताया कि शामली में बारिश के कारण 97 कच्चे मकान गिरे, जबकि कैराना में 44 और ऊन में 33 समेत जिलेभर में 174 मकानों को बारिश के कारण नुकसान हुआ है। सभी पीड़ितों के खाते में मुआवजा राशि भेज दी गई है।
- मकानों में 15 प्रतिशत से अधिक किसी का भी नुकसान नहीं
तहसीलदार ऊन अमित वर्मा, तहसीलदार शामली प्रशांत अवस्थी, कैराना तहसीलदार गौरव सांगवान ने बताया कि यदि कच्चे मकान में 15 प्रतिशत से अधिक नुकसान है तो पीड़ित को चार हजार की आर्थिक मदद दी जाती है। तीनों जगह सभी पीड़ितों का 15 प्रतिशत तक ही नुकसान है। इसके अलावा 100 प्रतिशत तक नुकसान होने पर एक लाख रुपये तक की आर्थिक मदद देने का भी नियम है।