इस वित्तीय वर्ष के मात्र छह दिन शेष रह गए और स्वास्थ्य विभाग के पास 12 करोड़ से ज्यादा का बजट पड़ा हुआ है, जिसको खर्च किया जाना है। जिसके चलते महकमे के अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं।
दरअसल स्वास्थ्य विभाग महत्वपूर्ण विभाग है। पब्लिक के स्वास्थ्य को देखते हुए महकमे को सरकार भारी बजट देेती है, ताकि बीमारियों की रोकथाम की जा सके और साथ ही जनहित में अन्य कार्यक्रम चलाए जा सके। वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए शामली में स्वास्थ्य विभाग को लखनऊ से 24.47 करोड़ रुपये का बजट मिला था। टीकाकरण, एनयूएचएम, लेप्रोसी, जेएसवाई, क्षय रोग आदि विभिन्न मदों के लिए यह बजट आवंटित किया गया था। अब इस वित्तीय वर्ष को छह दिन शेष बचे है और स्वास्थ्य विभाग को बजट खर्च करने में एडी से चोटी तक के जोर लगाने पड़ गए, बावजूद इसके अभी तक करीब 12 करोड़ से ज्यादा शेष है।
महत्वपूर्ण मदों में ही शेष पड़ा हुआ है बजट
स्वास्थ्य विभाग की राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन योजना में जिले एक करोड़ 16 लाख का बजट मिला, जिसमें से मात्र 51 लाख रुपये ही खर्च किया जा सका। इसके अलावा टीकाकरण में भी एक करोड़ दस लाख के सापेक्ष 51 लाख रुपये, कुष्ठ रोग में तीन लाख तीस हजार के सापेक्ष डेढ़ लाख रुपये, जननी सुरक्षा योजना में तीन लाख 25 हजार के सापेक्ष करीब तीन लाख रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा अन्य मदों का भी यही हाल है।
बाबुओं के फेर में लटका पड़ा है बजट
दो माह पूर्व एक बाबू का तबादला मुजफ्फरनगर हो गया था। जिसके बाद से उस बाबू का चार्ज अभी तक दूसरे बाबू को नहीं मिल पाया है, उधर उस बाबू का ट्रांसफर भी लखनऊ की गलती के चलते बीच में लटका पड़ा है। जिस कारण एनएचएम का बजट भी कायदे से नहीं लग पाया। इसके अलावा बाबुओं की भी कमी है, जिस कारण एक एक बाबू कई कई पटल देख रहा है।
जहां बजट की जरूरत पड़ी वहां पर प्रयोग किया गया, जरूरत के हिसाब से बजट खर्च किया जा रहा है। - डॉ. राजकुमार सीएमओ