फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तनख्वाह की बचत से नशे के खिलाफ संघर्ष

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

थानाभवन। नशा एक ऐसी बीमारी है जो हमारे समाज को दीमक की तरह जकड़ रही है। सरकार और सामाजिक संस्थाओं के तमाम जागरूक कार्यक्रमों के बावजूद नशाखोरी कम होने का नाम नहीं ले रही। मगर इसके बावजूद समाज में ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने नशे की इस बीमारी को जड़ से उखाड़ने का संकल्प लिया है। दिन प्रतिदिन वह इस संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। कुछ ऐसी ही है क्षेत्र के गांव मनट मनटी निवासी श्रीपाल की कहानी।
श्रीपाल पिछले सात साल से गांव-गांव जाकर नशे के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। उनका कहना है कि एक दिन मेहनत रंग लाएगी और हमारा समाज नशे से पूर्ण रूप से मुक्त हो जाएगा। श्रीपाल का जन्म एक जनवरी 1977 में क्षेत्र के गांव मनट मनटी में हुआ। परिवार की हालत ठीक नहीं होने के कारण वे सिर्फ कक्षा-10 तक ही पढ़ पाए। फिलहाल घर में पत्नी और तीन बच्चे हैं। श्रीपाल की बचपन से ही सामाजिक कार्यों में बहुत रुचि थी। इसी के चलते श्रीपाल दस साल पहले शांति कुंज गायत्री परिवार से जुड़े। पहले तीन साल तक वह गांव गांव जाकर लोगों को धार्मिक किताबें बांटते और उन्हें अध्यात्म के प्रति जागरूक करते। इसके बाद उन्होंने नशामुक्त समाज और पौधरोपण को अभियान बनाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

फिलहाल श्रीपाल मुजफ्फरनगर के एक प्राइवेट अस्पताल में संविदा पर नौ हजार रुपये में नौकरी करते हैं। समिति आय से श्रीपाल पैसे बचाकर गांव-गांव निकल पड़ते हैं। इस दौरान वह दीवारों पर विभिन्न स्लोगन बनाकर लोगों को नशे की लत छोड़ने की अपील करते हैं। साथ गांव के युवाओं के बीच पहुंचकर उन्हें भी नशे से शरीर को होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देते हैं। सिर्फ नशा ही नहीं श्रीपाल अपनी कला के दम पर लोगों को सफाई और पौधरोपण के लिए भी जागरूक करते हैं। श्रीपाल का मानना है कि यदि हम जीवन में कुछ बदलाव कर दे तो आने वाली पीढ़ी को हम बेहतर जिंदगी दे सकते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें