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जाबाज शहीद अंकित तोमर दिलो में आज भी है जिन्दा

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अमर उजाला ब्यूरो
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कैराना। एक साल पहले मुकीम काला गिरोह के शूटर साबिर जंधेडी से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए कैराना कोतवाली के जांबाज सिपाही अंकित तोमर की प्रथम पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। मौके पर पहुंचे एसपी ने कहा कि अंकित की शहादत को कैराना कभी नहीं भुला सकेगा।
शुक्रवार को शहीद अंकित तोमर की प्रथम पुण्यतिथि पर कोतवाली में श्रद्धांजलि सभा को आयोजन किया गया। इस मौके पर पुलिस अधीक्षक अजय कुमार कोतवाली पहुंचे तथा शहीद के चित्र पर पुष्प चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। एसपी ने कहा कि अंकित सच्चा और निडर सिपाही था। एसडीएम डॉ. अमित पाल शर्मा और सीओ राजेश कुमार तिवारी ने भी कोतवाली पहुंचकर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। उधर, कोतवाली प्रभारी भगवत सिंह ने कहा कि अंकित की बहादुरी को पुलिस विभाग सलाम करता है। दो मिनट को मौन रख कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई।
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रंगदारी, डकैती व हत्या के खौफ को मिटाया था अंकित ने
कैराना। मुकीम काला गिरोह का शार्प शूटर एक लाख का ईनामी साबिर जंधेडी 2017 में मैनपुरी जेल से फरार हो गया था। 2 जनवरी 2018 की रात साढे़ 9 बजे पुलिस को सूचना मिली की साबिर अपने गांव में आया हुआ है। तत्कालीन एसपी डा अजय पाल शर्मा ने खुद मोर्चा संभालते हुए पुलिस की चार टीमें गठित करते साबिर को उसके ही मकान में घेर लिया। पहली टीम में शामिल सिपाही अंकित तोमर अकेला ही साबिर के मकान की छत पर चढ़ गया तथा साबिर के कमरे के गेट पर लात मार कर गेट तोड़ दिया। अपने आप को पुलिस से घिरा देख साबिर ने दोनो हाथों से पिस्टल से गोलियों की बौछार करनी शुरू कर दी थी। अंकित तोमर ने भी गोलियां चलाईं, लेकिन साबिर की पिस्टल से निकली एक गोली अंकित के सिर में लग गई। वह घायल हो गिर गया। इसके बाद साबिर कमरे की छत से नीचे कुदा तो कोतवाली प्रभारी ने उसे दोनो हाथों से कस लिया लेकिन साबिर ने पिस्टल वाले हाथ पीछे मोड़ कर तीन गोलियां कोतवाल भगवत को भी मार दी। इतने समय में अन्य पुलिस कर्मियों को संभलने का मौका मिल गया और साबिर को वहीं ढेर कर दिया। तीन गोलियां लगने से घायल कोतवाल भगवत सिंह का मेरठ में उपचार हुआ जबकि सिर में गोली लगने से घायल अंकित तोमर दो दिन तक जिंदगी और मौत से जंग लड़ने के बाद चार जनवरी को वीर गति को प्राप्त हो गया। अंकित ने अपना बलिदान देकर कैराना की जनता को भय व आतंक से मुक्ति दिला दी। वहीं पुलिस के साथ ही कैराना की जनता भी अंकित को कभी नही भूल पाएगी।
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