बाजार में काफी महंगी बिकती है सब्जियां
शामली। मंडियों में सब्जियों के और बाजार के भाव में काफी अंतर है। मंडी से कहीं तीन गुणा अधिक भाव पर सब्जियां बाजार में बिकती हैं। अमर उजाला टीम ने मंगलवार को सब्जी मंडी के थोक और रिटेल बाजार के भाव की पड़ताल की तो इसका पता चला।
मंडियों में इन दिनों सब्जियों का भाव काफी कम है। चार-पांच दिनों से सब्जियों के भाव लगातार गिर रहे हैं। हरी सब्जियों का रेट कम होने से किसानों को कोई फायदा नहीं हो रहा है। किसान परेशान है कि उसकी लागत भी पूरी नहीं हो रही, लेकिन मंडी में मंदी बिकने वाली ये सब्जी कुछ ही दूर रिटेल मार्केट में पहुंचते पहुंचते तीन से चार गुणा महंगी हो जाती हैं। मंगलवार को अमर उजाला ने सब्जी मंडी के थोक और रिटेल मार्केट के भाव के बारे में जानकारी की तो हकीकत सामने आई। यानि फसल उगाने में दिन रात मेहनत कर रहे किसान के हिस्से में तीन से चार रुपये किलो आ रहे तो रिटेलर उसी सब्जी पर दो से तीन गुणा मुनाफा कमा रहा है।
सब्जी मंडी का थोक भाव प्रति किलो रिटेल मार्केट का भाव प्रति किलो
मूली 2 10
मेथी 3-4 10
बैंगन 4 10-15
लौकी 6 -8 20
टमाटर 8 -10 20
गोभी 4 10
पत्ता गोभी 8 20
आलू 10-15 20-30
किसान बोले खर्चा भी नहीं निकल रहा
सब्जी मंडी में आए किसान रामपाल, सरदारा का कहना था कि मंडी में सब्जी इतना मंदा है कि लागत पूरी नहीं हो रही। मूली दो रुपये किलो से भी कम बेचनी पड़ रही है। मजदूरी और घर से आढ़त तक लाने का खर्चा भी निकलना मुश्किल हो रहा है । मंदे में भी सब्जी बेचनी पड़ रही है।
दुकानदारों का ये है तर्क
सब्जियों के महंगे रेट पर जब रिटेलर दुकानदारों से बात की गई तो कहा कि उन्हें मंडी शुल्क ओर विकास शुल्क भी देना पड़ता है। इसके अलावा थोक में खरीदी गई सब्जियों में काफी खराब भी निकलती है। खराब होने वाली सब्जी भी उन्हें फेंकनी पड़ती है। ये सब जोड़कर ही वे सब्जी का रेट तय करते हैं।