कैराना (शामली)।
दारुल उलूम देवबंद के निर्देश पर राब्ता मदारिस इस्लामिया की ओर से कैराना के शिक्षण संस्थान जामिअतुस्सादह में तहसील क्षेत्र के मदरसा प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इस अवसर पर समाज के उत्थान हेतु मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता के लिए सर्वसम्मति से तीन प्रस्ताव पारित किए गए।
सोमवार को नगर के शामली रोड पर स्थित मदरसा जामिअतुस्सादह में हुई बैठक में दारूल उलूम से जुडे़ चार दर्जन से अधिक मदरसों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर दर्जा हिफ्ज, प्रारंभिक अरबी व फारसी की संयुक्त परीक्षा कराने हेतु सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए क्षेत्र में 10 केंद्र बनाए जाने पर सहमति जताई। प्रत्येक केंद्र पर 200 छात्रों की संयुक्त हिफ्ज परीक्षा के लिए चार भागों में विभाजित किया गया। वहीं, दूसरे प्रस्ताव में उक्त परीक्षा तहसील स्तर पर अलग-अलग तिथियों में होंगी, जो तहसील ऊन में 22, तहसील शामली में 23 तथा तहसील कैराना क्षेत्र में 28 व 29 तथा 30 अप्रैल में तीन चरणों में संपन्न होंगी। अंतिम प्रस्ताव में कहा गया कि मदरसा सुलेमानिया कांधला, मदरसा जामिअतुस्सादह कैराना, बदरूल उलूम गढ़ीदौलत, सबीलुल हुदा सुन्हेटी, जियाउल कुरान कैराना, मदीनतुल उलूम सोंता, नूर मोहम्मदिया झिंझाना व मदरसा महमूदिया पलठेडी केंद्र रहेंगे।
मौके पर राब्ता मदारिस इस्लामिया के जिला महासचिव एवं जामिअतुस्सादह के प्रबंध संचालक मौलाना इरफान साकिब कासमी ने कहा कि इस प्रकार की परीक्षाओं से बच्चों के अंदर छिपी प्रतिभा निखरती है और उनका बौद्धिक विकास होता है। मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता से ही समाज का उत्थान होगा। शिक्षा फर्श से अर्श तक पहुंचा देती है। मुफ्ती अब्दुल्लाह कासमी ने कहा कि दारुल उलूम देवबंद ने शिक्षा की गुणवत्ता पर सराहनीय कदम उठाया है, जिसके अधीन मदरसों के लिए यह बड़ी नेमत है। बैठक में कारी मसूद, कारी अरशद, कारी अब्दुल कादिर, कारी अफजाल आदि दर्जनों मदरसों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।