शामली/कांधला। सीडीओ के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव गंगेरू में कैंप लगाकर गर्भवती महिलाओं की जांच की। 112 गर्भवती महिलाओं ने अपने स्वास्थ्य की जांच कराई। सभी महिलाएं एनिमिक निकली। सभी को स्वास्थ्य संबंधी टिप्स दिए गए।
बता दें कि पूरे जिले में मेटरनल डेथ के सापेक्ष 37 प्रतिशत मौतें अकेले कांधला में हुई है। बुधवार को आयोजित हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में सीडीओ रेणु तिवारी ने कांधला ब्लॉक में गर्भवती महिलाओं की हालत पर चिंता जताई थी। इसके बाद सीएमओ डाक्टर राजकुमार के निर्देश पर एसीएमओ डाक्टर सुुुशील और एसीएमओ डाक्टर केपी सिंह के नेतृत्व में एक टीम का गठन कर बृहस्पतिवार को गांव गंगेरू भेजा गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गंगेरू पीएचसी में कैंप लगाया। इस दौरान गांव की 112 गर्भवती महिलाओं ने अपनी जांच कराई। महिलाओं का हीमोग्लोबिन, वजन और ब्लड प्रेशर चेक किया गया। हीमोग्लोबिन चेक करने पर चौंकाने वाली बात सामने आई। सभी महिलाएं एनिमिक मिली। इसके अलावा छह महिलाओं की हालत अत्यंत गंभीर मिली। डाक्टरों के अनुसार उनका हीमोग्लोबिन चार से सात ग्राम तक मिला। इन महिलाओं को आयरन सुकलोज दिया गया। चार महिलाओं का बीपी लो मिला, जबकि करीब एक दर्जन महिलाओं का वजन अपेक्षाकृत कम मिला। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी महिलाओं को जरूरत के हिसाब से दवाईयों का वितरण किया और उनको स्वास्थ्य के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान यूनिसेफ के डीएमसी हरेंद्र पंवार, डीपीएम आशुतोष श्रीवास्तव, डाक्टर शाइस्ता नाज, डाक्टर निधि सैनी, डाक्टर राजेश्वर आदि मौजूद रहे।
इमरजेंसी ट्रे में नहीं मिले इंजेक्शन
एसीएमओ डाक्टर सुशील ने बताया कि आपात स्थिति से निपटने के लिए इमरजेंसी ट्रे में कुछ इंजेक्शन जैसे एविल, डेक्सा, हाईड्रोकोर्टीसोन और एडरेज नलीन रखे जाते है। ताकि आपात स्थिति में मरीज को लगाया जा सके। तीन माह से इमरजेंसी ट्रे में से इंजेक्शन नहीं है।