मां भारती का कंठहार है हिंदी
शामली। साहित्यिक संस्था चेतना के तत्वावधान में हिंदी दिवस पर काव्य संध्या हुई। इस दौरान प्रख्यात कवि प्रीतम सिंह पीतम ने कहा मां भारती का शृंगार है हिंदी। क्रांतिकारियों का कंठहार है हिंदी।
शहर के वीवी इंटर कॉलेज में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में साहित्यिक संस्था चेतना की ओर से काव्य संध्या आयोजित की गई। काव्य संध्या का शुभारंभ कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने मां शारदे की वंदना से किया। सौरभ कुमार आर्य ने कहा कि जो दुश्मन को प्यार से अपना बनाती है, जो हर धर्म को एक धागे से बांधती जाती है, जो देव नागरी में देवों की गाथा सुनाती है, वो हिंदुस्तान की भाषा हैं, वो हिंदी कहलाती हैं। वसीम झिंझानवी ने कहा कि हिंदू-मुसलमान का दुलारा लगता है, हमको तिरंगा जान से प्यारा लगता है। सुनील टम्मी अरोरा, शिक्षिका सुरभि मित्तल, अनुराग शर्मा, कवि प्रीतम सिंह पीतम ने अपनी पंक्तियां सुनाई। इस मौके पर डॉक्टर अनिल रस्तौगी, डॉक्टर मोहनलाल, डॉक्टर कृष्ण गोपाल, डॉक्टर नीलेश वशिष्ठ, संदीप गर्ग, रुचिर गोयल, नीरज संगल, राकेश कौशिक एडवोकेट, जीवन ज्योति अरोरा, कुंदन लाल, मनोज पुंडीर, शिखा अग्रवाल, अनीता अग्रवाल, किरण कशिश सिरोहा, रूपा वर्मा, वीना गुप्ता, पूजा सिंघल, गीता रानी, पूनम श्रीवास्तव, जितेंद्र सिंह, गौरव शर्मा, रामपाल सिंह, माधवेेंद्र गुप्ता, मनोज कुमार, कपिल वशिष्ठ, कार्तिक सरोहा, सीमा शर्मा, कवर सिंह, अंजू मलिक रहे। वहीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रीतम सिंह प्रीतम ने और संचालन डॉक्टर विपिन कौशिक ने किया।