शामली। मेरठ-करनाल राष्ट्रीय राजमार्ग 709 बी। शामली जिले में 38 किलोमीटर के इस हाइवे पर 123 कट है। जिले में हाइवे पर कट के लिए ना तो कई मानक है और ना ही नियम है। जिसने जहां चाहा वहां अपना कट बना लिया। इन कटों पर ना तो प्रशासन का ध्यान है और ना ही नेशनल हाईवे अथोरिटी ऑफ इंडिया का। यही कारण है कि हाइवे पर बने ये कट जानलेवा साबित हो रहे है।
मेरठ-करनाल हाइवे सपा सरकार में बनकर तैयार हुआ था। चंडीगढ़ और मेरठ को सीधे जोड़ने वाले इस हाइवे पर रोजाना हजारों वाहन दौड़ते है। झिंझाना के बिड़ौली यमुना पुल से लेकर लिसाढ़ आईटीआई तक जिले में हाइवे पर 38 किलोमीटर का सफर है। अमर उजाला ने हाइवे पर होने वाले हादसों तथा इन कारणों की पड़ताल की तो कई कारण सामने आए। कहीं हाइवे संकरा मिला तो कहीं पर नदी पर क्रासिंग में पुल सिंगल मिला। सबसे खतरनाक हाइवे पर 123 कट मिले। क्रासिंग मार्ग को छोड़ दे तो इनमें से 60 प्रतिशत कट बिना वजह के मिले। कुछ कट को हाइवे पर ढाबे वालों ने बनवाया है तो कुछ कट को ग्रामीणों ने अपनी मर्जी से बना लिया। मेरठ की ओर से शामली में घुसने से पहले ही सिंभालका गांव से लेकर शामली फाटक तक ही दस से अधिक कट मिले, लेकिन पुलिस-प्रशासन और एनएचएआई का इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं है।
ढाबो के आगे 40 से अधिक कट
मेरठ-करनाल हाइवे पर करीब 50 से अधिक ढाबे है। इन ढाबों पर हाइवे पर चलने वाले वाहन लंच, डिनर और ब्रेकफास्ट करते है। इन्हीं ढाबों के सामने हाइवे नेशनल हाइवे पर 40 से अधिक कट बनाए गए है। ढाबे पर वाहन चालक जब जाने के लिए कट का प्रयोग करता है तो हादसे की संभावना बनी रहती है।
डिवाइडर तोड़कर बना लिया रास्ता
नेशनल हाइवे पर कट बेहद खतरनाक है, लेकिन किसी को इसकी समझ नहीं है। शामली में इस हाइवे पर यह आलम है कि लोगों ने अपनी मर्जी से कई कट डिवाइडर तोड़कर बना रखे है। इनमें केरटू खोखरी नदी के पास तीन कट है। इसके अलावा कई गांवों में भी ग्रामीणों ने अवैध कट बना रखे है।
संकरे पुल भी बन रहे है घातक
मेरठ-करनाल हाइवे पर जिले में तीन नदियां पड़ती है। जिनमें सबसे पहली यमुना नदी, दूसरी काठ नदी, तीसरा काबड़ौत पुल। तीनों पुल आज तक ज्यों के त्यों है, इन पर आकर फोरलेन हाइवे टू लेन में तब्दील हो जाता है। हालांकि काबड़ौत के पास नया पुल बनाने के लिए काम चल रहा है।