संवाद न्यूज एजेंसी
कैराना। बरसात के कारण एक बार फिर मामौर झील ने कहर बरपाया है। झील की मेंड़ टूटने से किसानों की करीब 250 बीघा गोभी व धान की फसल जलमग्न हो गई। उन्होंने प्रशासन को अवगत कराकर पानी की रोकथाम की मांग की है।
कैराना नगर की निकासी मामौर झील में होती है। बीते तीन दिन तक रुक-रुक हुई मूसलाधार बारिश से झील में पानी का दबाव बढ़ गया है। इसके चलते रविवार को झील की मेंड़ क्षतिग्रस्त हो गई। जिससे किसानों के खेतों में झील का गंदा पानी घुस गया। किसानों ने एकत्र होकर झील में पानी की रोकथाम के प्रयास किए परंतु सफलता नहीं मिली। इसके बाद किसानों ने हालात के बारे में स्थानीय प्रशासन को अवगत कराया।
किसानों का कहना है कि प्रशासन की ओर से मेंड़ दुरुस्त कराने के लिए शाम तक कोई प्रयास नहीं किए गए। वहीं, झील की मेड़ टूटने के चलते किसान इस्लाम, अंगूरा, शराफत, शौकत, महफूज, शादीन, रमजान, हाशिम, मतलूब, कामिल, शरीफ आदि की धान व गोभी की करीब 250 बीघा फसल जलमग्न हो गई है। शाम तक पानी की रोकथाम नहीं होने से किसानों के खेत जलमग्न होते जा रहे थे। किसानों ने प्रशासन से पानी की रोकथाम के लिए मेंड़ दुरुस्त कराने की मांग की है।
किसानों के अरमानों पर पानी फेरती रही झील
मामौर झील के ओवरफ्लो होने की समस्या दशकों से है। कैराना नगर की निकासी के गंदे पानी के कारण झील की मेंड़ केवल बरसात के साथ अन्य दिनों में भी टूटती रहती है। जिससे किसान लंबे समय से बर्बादी का दंश झेल रहे हैं। इस बाबत तहसीलदार प्रियंका जायसवाल का कहना है कि समस्या से निजात दिलाने के लिए नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत झील के निकट सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माणाधीन है। इसका निर्माण 2023 में पूर्ण होने के बाद झील के पानी ट्रीटमेंट कर यमुना में छोड़ा जाएगा। जिससे किसानों को समस्या से निजात मिल सकेगी।