अश्व प्रजाति के पशुओं को ग्लैंडर्स से बचाइए
अमर उजाला ब्यूरो
शामली। पशुपालन विभाग के सहारनपुर मंडल के अपर निदेशक डाक्टर यशपाल सिंह नायक ने कहा कि अश्व प्रजाति में होने वाली ग्लैंडर्स बीमारी काफी खतरनाक है। उन्होंने जिले में प्रति माह अश्व प्रजाति के पशुओं के ब्लड सैंपल मासिक तौर पर राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजे जाने पर जोर दिया।
बृहस्पतिवार को विकास भवन के सभागार में आयोजित प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ पशुपालन विभाग के सहारनपुर मंडल के अपर निदेशक डाक्टर यशपाल सिंह नायक ने किया। राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान बागपत के निदेशक डाक्टर प्रवीण मालिक ने पशुओं से ब्लड सैंपल एकत्र करते समय ध्यान रखने वाली सावधानियों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि पशुओं में भी एंटी बायोटिक का संतुलित उपयोग होना चाहिए। प्रशिक्षण में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि अश्व प्रजाति के पशुओं जैसे घोड़ा, गधा और खच्चर आदि में फैलने वाली ग्लैंडर जानलेवा बीमारी है, जिसका इलाज संभव नहीं है। यह रोग मुख्यत प्रदूषित चारा व पानी ग्रहण करने से होता है। बीमार पशु के संपर्क में आने पर त्वचा की खरोंच या साँस के द्वारा यह जीवाणु स्वस्थ पशु या मनुष्य में प्रवेश करता है। इस बीमारी में पशु को तेज बुखार का आना, नाक से पानी आना, जिसका बाद में गाढ़ा पीला हो जाना तथा त्वचा पर गांठें पड़ जाना, सांस का तेज चलना आदि है। प्रशिक्षण में ब्रूक्स इंडिया के डॉक्टर महेंद्र चौधरी ने बताया कि बीमार पशुओं को यूथेनेसिया किया जाता है। जिले के ग्लैंडर्स एवं फार्सी के नोडल अधिकारी डाक्टर हिमांशु शर्मा ने बताया कि इस रोग से पशु की मृत्यु हो जाती है। उन्होंने रोग के रोकथाम के लिए स्वस्थ पशुओं को बीमार पशु से अलग बांधना, बीमार पशु की मृत्यु होने की दशा में मृत्यु के स्थान को जीवाणुनाशक घोल से साफ़ करने का सुझाव दिया। प्रशिक्षण के माध्यम से पशु स्वामियों को संदेश दिया कि वे अपने पशुओं के रक्त नमूने एकत्र करने में पशुपालन विभाग शामली को सहयोग प्रदान करें।