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हिन्दी का राजभाषा से राष्ट्रभाषा के रूप में सफर एवं भविष्य

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कैराना। कस्बा स्थित विजय सिंह पथिक राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शुक्रवार को हिंदी दिवस पर कार्यक्रम आयोजन किया गया। शुभारंभ प्राचार्य प्रोफेसर चमनलाल द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण और दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। हिंदी के प्राध्यापक डॉक्टर मुकेश कुमार ने विकास यात्रा पर सांगोपांग प्रकाश डाला।
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उन्होंने कहा हिंदी के विकास को भले ही सरकार का साथ नहीं मिला, लेकिन जनता और बाजार के सहयोग से यह एक दिन अपने मुकाम को हासिल कर लेगी। डॉ. आंचल यादव ने हिंदी को अपनी मातृभाषा रूप को महत्वपूर्ण मानते हुए इसे उच्च शिक्षा की भाषा बनाए जाने की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया। प्राचार्य प्रो. चमनलाल ने कहा कि हिंदी को हमारे समाज में सामाजिक सद्भाव और विकास की भाषा बनाया जाना चाहिए। डॉ. जितेंद्र कुमार विकल ने मातृभाषा, राजभाषा और राष्ट्रभाषा में सूक्ष्म अंतर को बहुत स्पष्ट रुप से दर्शाते हुए हिंदी की स्थिति को स्पष्ट किया। डॉ. अजय बाबू शर्मा ने हिंदी भाषा को हमारी अस्मिता का हमारी पहचान का अंग बताया। डॉ. योगेंद्र पाल सिंह ने हिंदी को एक सशक्त भाषा बताया। यह भाषा सामान्य जनता के लिए संप्रेषण का एक बेहतर माध्यम है। डॉ. भूमेश कुमार ने हिंदी भाषा में उपस्थित संप्रेषण की ताकत को अपने उदाहरणों के द्वारा बताया। डॉ. राजेश कुमार अग्रवाल ने आज के दौर में हिंदी भाषा की बढ़ती हुई प्रासंगिकता की ओर संकेत किया। तृतीय वर्ष की छात्रा नैना ने हिंदी भाषा की विकास यात्रा पर एक गीत प्रस्तुत किया। हिंदी दिवस आयोजन का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। मौके पर डॉ. उत्तम कुमार, डॉ. नीतू त्यागी, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. रीनू, सुभाष, गौतम कुमार, कृष्णपाल आदि मौजूद रहे।
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