तालाबों पर अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई कागजों में सिमटी
शामली। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर पिछले दिनों अपनी ही पार्टी की प्रदेश सरकार के खिलाफ सवाल उठाने वाले भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने अब जल संकट को लेकर संसद में सवाल किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 90 प्रतिशत जलाशयों की भूमि पर अवैध कब्जे हैं, जबकि कब्जे हटाने की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सिमटी हुई है। भविष्य में जल संकट से निपटने प्रभावी कदम उठानी की मांग की है।
बृहस्पतिवार को कैराना से भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने संसद में नियम 377 के तहत प्रश्न किया। उसमें कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जल संकट निरंतर भयावह होता जा रहा है। बरसात के कुछ महीनों को छोड़कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एकमात्र यमुना नदी नौ महीने तक सूखी रहती है। उस दौरान नदी में एक बूंद पानी नहीं होता। वहीं, शेष स्थानीय बरसाती नदियां सूख जाती हैं। भूजल स्तर भी लगातार गिर रहा है। भूजलस्तर को बढ़ाने में जलाशयों और तालाबों की अहम भूमिका होती है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपदों में 90 प्रतिशत जलाशयों पर अवैध कब्जे हैं। अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई भी महज कागजों तक सिमटकर रह गई है। वहीं, जनपद शामली और सहारनपुर को जोड़ने वाली काठा नदी सूखी पड़ी है तथा जगह जगह अवैध कब्जे हो गए हैं। यदि सरकार चाहे तो उक्त नदी में पानी की संभावना हो सकती है, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा और लाखों किसानों को इसका लाभ मिलेगा।